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भगन्दर क्या है ? जाने इसके लक्षण और सहि इलाज

 भगन्दर क्या है.  भगन्दर, एक चिरकालिक रोग है, जिसमें गुदा मार्ग के अंदर से गुदा की वाह्य त्वचा के बीच सुरंग जैसा नाली बन जाता है। सामान्यत: यह बीमारी गुदामार्ग के आसपास फोड़ो फटने या ऑपरेशन के बाद होती है। जिसमें मवाद आता रहता है। सभी फोड़े तो भगन्दर नहीं बन पाते हैं पर यह बात सही है कि कई फोड़े भगंदर का रूप ले लेते हैं।  भगंदर के कारण  एनस यानी गुदा के अंदर कई सारी ग्रंथि होते हैं, जब यह ग्रथिंया अनुचित खानपान, असमय मलत्याग, या विरूद्द आहार विहार आदि कारणों से संक्रमित होने से व सही समय उपचार न मिल पाने से भगंदर का रूप धारण कर लेती हैं। और यह धीरे-धीरे अपना रास्ता बनाते हुए आपकी एनस के आसपास त्वचा के बाहर तक छेद कर देती है, इसी सुरंगनुमा जगह को एनल फिस्ट्यूला कहते हैं, जो कि आपके ग्लैंड और त्वचा के बाहरी छेद को जोड़ती है। अधिकतर समय, मवाद की वजह से भगंदर होता है, लेकिन यह टीबी, सेक्शुअली ट्रांसमिटिड डिजीज और बोवल को प्रभावित करने वाली अन्य बीमारियों के कारण भी हो सकता है।  भगंदर के लक्षण  .अगर एनस के रास्ते में बार बार फोड़ा होता है तो यह भगंदर की वजह हो सकता है।  .एनस क्षेत्र में दर्द और सूजन की स्थिति होना।  एनस के रास्ते में पस या खून निकलने पर भी भगंदर होने की आशंका होती है।  .एनस के आसपास एक गहरा या हल्का छेद और उससे बदबूदार पस का स्राव होना।  .एनस क्षेत्र में भारी जलन होने भगंदर की ओर इशारा करता है। पस के बार बार बाहर निकलने की वजह से यह जलन होती है।  .पेट में कब्ज बना रहना और मलत्याग करते वक्त एनस क्षेत्र में जलन होना।    भगंदर के प्रकार –   भगंदर दो प्रकार के होते हैं।    1.सामान्य या जटिल फिस्टुला –   अगर एक भगंदर है तो उसे सामान्य कहा जाता है और एक से अधिक भगंदर होने जटिल भगंदर कहते हैं।    2.लो या हाई फिस्टुला –   भगंदर होने की जगह के आधार पर इसे लो या हाई का भी नाम दिया गया है। अगर भगंदर स्फिंकटर मसल्स (दो ऐसी मांसपेशीयां जो एनस के रास्ते को खोलने या बंद करने का काम करती है) के एक तिहाई हिस्से पर है तो उसे लो फिस्टुला कहा जाता है। लेकिन अगर भगंदर स्फिंकटर मसल्स को पूरी तरह से कवर कर चुका है तो उसे हाई फिस्टुला कहा जाता है।  ऐलोपैथ उपचार से फिर उभर जाता है भगन्दर  ऐलोपैथ में भगन्दर रोग का कोई सफल उपचार नहीं है, कारण यह कि या तो एलोपैथ के चिकित्सक दवाओं के नाम पर दर्द की गोलियां खिलाते हैं या फिर या फिर ऑपरेशन करते हैं दवायें दवायें खाने से सिर्फ कुछ दिन दर्द कम रहता है। साथ ही ऑपरेशन के बाद फिर से भगन्दर उभर जाता है। कई रोगी तो दस से अधिक बार ऑपरेशन कराते हैं फिर भी भगन्दर से निदान नहीं मिल पाता।  सही समाधान है आयुर्वेद में  भगन्दर रोग का सही समाधान आयुर्वेद में है। क्योंकि आयुर्वेद भगंदर के इलाज के साथ ही भगन्दर के होने के कारण व शरीर में उससे होने वाले असर को भी कम करता है। आयुर्वेद में इलाज के साथ ही जीवनशैली को स्वस्थ करने पर जोर दिया जाता है।  बी.के क्षारसूत्र एंड एनोरेक्टल केयर  बवासीर भगन्दर व अन्य सभी गुदमार्गगत रोगों के लिए बी.के क्षारसूत्र एंड एनोरेक्टल केयर सबसे सफल उपचार प्रदान सरता है। यहां क्षारसूत्र चिकित्सा पद्दति से गुदमार्गगत रोगों का सफलतापूर्वक समाधान किया जाता है। यहां के अनुभवी चिकित्सकों अत्याधुनिक तकनीकियों व विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ गंभीर से गंभीर गुद संबन्धित रोगियों को स्वस्थ किया जा रहा है। अगर आप या आप से जुड़ा कोई भी सदस्य बवासीर भगंदर, मलत्याग के समय खून आने, मल के रास्ते फोड़े, मस्से के दर्द खुजली व जलन, समेत गुदमार्ग की किसी भी समस्या से परेशान हैं तो बिना देर किए बी.के क्षारसूत्र एंड एनोरेक्टल केयर में इलाज कराकर इस बीमारी को जड़ से दूर करें। बीके क्षारसूत्र एंड एनोरेक्टल केयर विश्वप्रसिद्द आयुर्वेद संस्सान बीके आरोग्यम एंड रिसर्च सेंटर का विंग है जहां सफलतापूर्वक इन रोगों का उपचार किया जाता है।     

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कैसे पाये न्यूरो सम्बंधित रोगो से जल्द से जल्द छुटकारा ( 100% गारंटी )

न्यूरो डिजीज क्या है ? मानसिक रोग को न्यूरो डिजीज या मनोविकार भी कहा जाता है। मानसिक रोग की स्थिति में व्यक्ति की मनोदशा, यादाशत, स्वभाव इत्यादि की प्रक्रिया पर असर पड़ता है और व्यक्ति का अपने भावों इत्यादि पर कोई काबू नहीं रहता है। न्यूरोलॉजिकल डिसीज में मुख्य रूप से मिर्गी, अल्जाइमर, डिमेंशिया, स्ट्रोक, माइग्रेन, सिरदर्द, न्यूरोइंफेक्शन, ब्रेन ट्यूमर, नर्वस सिस्टम का ट्रॉमेटिक डिसऑर्डर आदि न्यूरो डिजीज में आते हैं। क्यों होती है न्यूरो की बीमारी ? हमारा ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और नर्व मिलकर नर्वस सिस्टम तैयार करता है। ये सभी मिलकर बॉडी के फंक्शन को कंट्रोल करते हैं। अगर व्यक्ति के नर्वस सिस्टम के किसी भी पार्ट में समस्या हो जाती है तो व्यक्ति को बोलने में, सांस लेने में, सीखने में और मूव करने में दिक्कत हो सकती है। खतरनाक रसायनों के संपर्क में आने से, कीटनाशकों के अधिक उपयोग से तनाव, डिसलोकेशन और एक्सट्रीम वेदर के कारण भी न्यूरोलॉजिकल फंक्शन प्रभावित होती है। न्यूरो डिजीज की स्थिति ? दुनिया भर में लाखों लोग न्यूरोलॉजिकल डिसीज से प्रभावित हैं। हर साल स्ट्रोक से करीब 6 मिलियन लोगों की जान जाती है। वहीं करीब 50 मिलियन से ज्यादा लोग मिर्गी, 47.5 मिलियन लोग डिमेंशिया से जूझ रहे हैं। तेजी से हो रहे सामाजिक बदलाव, शहरीकरण व आधुनीकरण की वजह से भी न्यूरो की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इलाज की स्थिति मॉडर्न मेडिकल यानि ऐलोपैथ में न्यूरो संबन्धी रोगों कोई पूर्ण समाधान नहीं है। इलाज के नाम पर बड़े-बड़े भवनों और नामी चिकित्सकों के पास लोग जाते हैं पर सही ये है कि कोई समुचित चिकित्सा ऐलोपैथ के पास नहीं है। इस बात को आप न्यूरो पेशेंट्स के बढ़ते आंकड़े से भी समझ सकते हैं। आयुर्वेद ही एकमात्र उपचार न्यूरो संबन्धी बीमारियों का इलाज सिर्फ और सिर्फ आयुर्वेद में है। कारण कि आयुर्वेद में सिर्फ एक बीमारी नहीं बल्कि बीमारी के कारणों को जानकर पूर्ण शरीर का इलाज किया जाता है। आयुर्वेद का कहता है कि जिन पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु) से मानव का शरीर बना है उन्ही पांच तत्वों से ही ब्रह्मांड भी बना है। ऐसे में शरीर में जिन तत्वों की कमी होती है या अधिकता होती है उसे संतुलित करके इलाज किया जाता है। बी.के न्यूरो केयर है सर्वेश्रेष्ठ न्यूरो संबन्धी बीमारियों का पूर्ण निदान बी.के. न्यूरो केयर में किया जा रहा है। जहां सैकड़ों गंभीर न्यूरो संबन्धित रोगी उपचार पा रहे हैं और स्वस्थ हो रहे हैं। बी.के. न्यूरो केयर बीके आरोग्यम एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड का ही विंग है। जो पिछले 40 साल से भी अधिक समय से गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहा है। यहां न्यूरों संबन्धी बीमारियों के इलाज के लिए अनुभवी चिकित्सकों की टीम, विश्वस्तरीय सुविधाओं, आधुनिक तकनीकी, पूर्ण आयुर्वेदिक औषधियों के साथ ही कारगर नेचुरोपैथी से सफलता पूर्वक इलाज किया जाता है। बी.के. आरोग्यम का चयन क्यों करें ? 1-आईएसओ जीएमपी (ISO&GMP) सर्टिफाईड औषधियां 2-भारत का सबसे विश्वसनीय आयुर्वेदिक रिसर्च हॉस्पिटल 3- एक लाख से अधिक मरीजों को स्वस्थ करने रिकॉर्ड 4-20 साल से अधिक किडनी रोग के इलाज का अनुभव 5-200 से अधिक कुशल व अनुभवी चिकित्सकों की टीम 6-अपने फॉर्म हाउस से उगाई गईं औषधियों का प्रयोग 7- विशिष्ट वैज्ञानिकों की टीम 8-अपने वैज्ञानिकों द्वारा बनाई औषधियों का उपयोग 9- ऑनलाइन ओपीडी सुविधा 10- आयुर्वेद आईपीडी की सुविधा 11-अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस आयुर्वेदिक रिसर्च हॉस्पिटल 12- प्राचीन औषधियों व आधुनिक तकनीकी का समन्वय 13- नागार्जुन पद्दति से इलाज की सुविधा 14- पंचकर्म की सुविधा 15.वाराणसी, लखनऊ, दिल्ली समेत कई शहरों में हमारी शाखाएं सोचें नहीं, जिंदगी बचायें अगर आप या आपके परिवार का कोई भी सदस्य न्यूरो संबन्धी बीमारियों से ग्रसित है तो वक्त सोचने का नहीं जिंदगी बचाने का है। बी.के. आरोग्यम देश का सबसे पुराना और विश्वसनीय एकमात्र मल्टीस्पेशियलिटी आयुर्वेदिक अस्पताल है जहां से हर रोज न्यूरो संबन्धी बीमारियों से ग्रसित मरीज स्वस्थ हो रहे है। हमारा लक्ष्य आपकी जिंदगी बनाना है।

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Covid -19 महामारी के दौर में थेरेपिस की मदद से अपने इम्यून सिस्टम को कैसे बढ़ाये?

 कोरोना वायरस इस समय दुनिया के लिए सबसे बड़ा सर दर्द बना हुआ है। दुनिया का हर एक देश कोरोना वायरस को हराने का भरसक प्रयास कर रहा है लेकिन अभी तक किसी को भी कोरोना के खिलाफ जंग में सफलता नहीं नसीब हुई है। दुनिया के सभी आधुनिक देश अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि कोरोना वायरस के खिलाफ कोई अच्छी एवं असरदार वैक्सीन का निर्माण करेंलेकिन किसी भी देश को अभी तक सफलता नहीं मिली है। कोरोना वायरस ने भारत को भी अपने गिरफ्त में ले लिया है।   भारत में रोजाना लगभग 1 लाख कोरोना के केस रजिस्टर हो रहे हैं। सरकार के अनेकों प्रयास के बावजूद देश में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि कोरोना वायरस के कारण भारत में मृत्यु दर और देशों के मुकाबले में काफी कम है लेकिन इसके बावजूद देश में रोजाना लगभग एक हजार लोग इस खतरनाक संक्रमण की वजह से अपनी जान गवां रहे हैं।   भारत में लोगों के लिए राहत की बात यह है कि भारत में कोरोना वायरस से रिकवरी रेट 78% के आसपास है जो कि किसी और आधुनिक देश के मुकाबले में बहुत अच्छा है। भारत में अगर रोजाना 1 लाख नए कोरोना केस मिलते हैं तो दूसरी तरफ 1 लाख से ज्यादा लोग ठीक होकर अपने अपने घर को वापस भी लौटते हैं। भारत में अब तक 45 लाख कोरोना के मरीज मिल चुके हैं लेकिनआश्चर्यजनक आंकड़ा यह है कि इसमें से लगभग 37 लाख लोग स्वस्थ होकर अपने अपने घरों को लौट चुके हैं।   अब आप सभी सोच रहे होंगे कि आखिर भारत का रिकवरी रेट इतना अच्छा क्यों है। सबसे पहली वजह जिसकी वजह से भारत का रिकवरी इतना अच्छा है वह यह है कि भारत के लोगों की इम्युनिटी काफी स्ट्रांग है। यह बात पूरे विश्व में साबित हो चुकी है कि जिस भी व्यक्ति की इम्युनिटी स्ट्रांग है वह कोरोना वायरस को आसानी से हरा सकता है। और अगर बात की जाए भारतीय लोगों की तो और सभी देशों के मुकाबले में भारतीय लोगों की इम्युनिटी काफी अच्छी होती है। इसी वजह से भारत में लोग आसानी से कोरोना वायरस को मात दे पा रहे हैं।   दूसरी वजह यह है कि भारत में मौजूद हर एक क्वॉरेंटाइन सेंटर में लोगों को थेरेपी की मदद से कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाया जा रहा है। ना सिर्फ कोरोना वायरस बल्कि थेरेपी की मदद से पिछले काफी सालों में लोगों ने कई बड़ी बड़ी बीमारियों को मात दी है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर किस तरह से कोविड-19 के दौरान थेरेपी की मदद से आप अपनी इम्युनिटी बढ़ा सकते हैं।   सबसे पहले आपको यह जानना होगा कि आखिर थेरेपी होती क्या है। हम सभी जानते हैं कि जब भी किसी को कोई बीमारी होती है तो सबसे पहले लोग डॉक्टर को दिखा कर उस बीमारी की दवा लेते हैं। आयुर्वेद या फिर एलोपैथी दोनों ही प्रकार की दवाओं से लोगों को आराम महसूस होता है। लेकिन एक इलाज है ऐसा भी है जिसमें आपको दवा की कोई आवश्यकता नहीं होती और उस इलाज को ही थेरेपी कहा जाता है। थेरेपी के दौरान लोगों को दवा का अल्टरनेटिव बताया जाता है।   कई बार तो ऐसा देखने को मिला है कि कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जिनका दवा से इलाज संभव नहीं हो पाता लेकिन थेरेपी की मदद से उस बीमारी का इलाज ढूंढा गया है। थेरेपी के दौरान लोगों को अलग-अलग चीजों के बारे में बताया जाता है। योग और एक्सरसाइज जैसी चीजें थेरेपी में ही शामिल है। आम शब्दों में कहें तो थेरेपी के द्वारा शरीर के उस महत्वपूर्ण अंग पर प्रभाव डाला जाता है जिसको की हमें किसी भी प्रकार के रोग से मुक्त करना होता है। योग और एक्सरसाइज की मदद से हम कई बीमारियों को हरा सकते हैं।  दुनिया के बहुत से मशहूर योग गुरुओं ने भी योग की ताकत के बारे में हमें बताया है। अपने जीवन में हमने कई ऐसे लोगों को देखा होगा जिन्होंने योग की मदद से बहुत ही खतरनाक बीमारियों को हराया है। न सिर्फ योग बल्कि थेरेपी की मदद से इंसान को आत्मिक शांति का भी अनुभव होता है। शरीर के कई लोग ऐसे होते हैं जो कि व्यस्त जीवनशैली के कारण शरीर में उत्पन्न हो जाते हैं। इसी व्यस्त जीवन से छुटकारा पाने के लिए लोग कभी-कभी थेरेपी का सहारा लेते हैं। थेरेपी की मदद से व्यक्ति को शांति का अनुभव होता है और वही शांति व्यक्ति के शरीर में मौजूद समस्या को भी दूर कर देती है।     अब बात करते हैं कि आखिर किस तरह से हम थेरेपी की वजह से कोरोना वायरस को भी मात दे सकते हैं। दरअसल कोरोना वायरस एक ऐसा संक्रमण है जो कि कमजोर इम्युनिटी वाले व्यक्ति को काफी परेशान करता है। ऐसे में महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति अपने शरीर की इम्युनिटी को मजबूत रखे। अगर व्यक्ति की इम्युनिटी मजबूत है तो अगर उसको कोरोना संक्रमण हो भी जाएगा तो वह व्यक्ति बहुत जल्द उस संक्रमण से उभर सकता है।     दुनिया को अभी भी कोरोना के खिलाफ स्थिर वैक्सीन की तलाश है। वैक्सीन न होने के बावजूद भी लोग कोरोना को हरा पा रहे हैं क्योंकि थेरेपी उनकी मदद कर रही है। थेरेपी की मदद से लोगों से वह चीजें कराई जा रही है जिसकी वजह से उनकी इम्यूनिटी पर प्रभाव पड़ा है और उनकी इम्यूनिटी मजबूत बन रही है। थेरेपी के दौरान व्यक्तियों के खान पान पर भी ध्यान दिया जाता है। व्यक्तियों को सिर्फ वही खाने-पीने की आवश्यकता होती है जिससे उनकी इम्युनिटी पर असर हो और उनकी इम्यूनिटी मजबूत बने।   भारत में बने हर क्वॉरेंटाइन सेंटर पर इसी प्रकार से लोगों की मदद की जा रही है। लोगों को वही खाने पीने को दिया जा रहा है जिससे कि उनका फायदा हो और उनकी इम्यूनिटी मजबूत हो। और यही एक वजह है कि भारत में लोग कोरोनावायरस को आसानी से हरा पा रहे हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी इम्युनिटी इतनी मजबूत हो कि कोरोना वायरस भी आपका कुछ न बिगाड़ सके तो आज से घर में थेरेपी शुरू कर दीजिए। 

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किडनी फेलियर में कमजोरी कैसे दूर करे

आजकल भाग दौड़ से भरी जिंदगी में किसी भी व्यक्ति को जीवन के किसी भी मोड़ पर किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है। छोटी मोटी बीमारियों से तो लोग खुद को बचा सकते हैं लेकिन कभी कभी ऐसा होता है कि ज्यादा लापरवाही के कारण व्यक्ति के शरीर में एक बड़ी बीमारी घर बना लेती है और उस बीमारी के कारण शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर भी बुरा असर पड़ता है। तो ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक है कि हम उस खतरनाक बीमारी से जितनी जल्दी से जल्दी हो सके दूर हो लें क्योंकि अगर हम ऐसे करने में असफल रहेंगे तो आगे चलके वो बीमारी हमारे शरीर और हमारे जीवन के लिए हानिकारक बन जाएगी।  दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं किडनी सम्बंधित समस्याओं के बारे में। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि किडनी हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की सूची में सबसे ऊपर आता है, इसलिए किडनी को स्वस्थ रखना हर व्यक्ति का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। हम सभी लोगों को यह पता है कि किडनी का काम शरीर की गंदगी को दूर करना है। किडनी हमारे शरीर के खून को साफ रखती है। किडनी हमारे शरीर के अंदर के दूषित पदार्थों को बाहर निकालने की क्रिया को अंजाम देती है। परंतु दोस्तों अगर जीवन के किसी भी मोड़ पर हमारी किडनी में कोई समस्या होती है तो इसका असर सीधा हमारे शरीर के बाकी अंगों पर भी पड़ता है। किडनी में किसी भी समस्या का सीधा मतलब यह है कि हमारे शरीर की गंदगी को बाहर करने वाला अंग सही से काम नहीं कर रहा है। यानी कि शरीर के अंदर मौजूद दूषित पदार्थ शरीर से बाहर नहीं जा पाएंगे। और यही दूषित पदार्थ शरीर में मौजूद रहकर हमारे शरीर के बाकी अंगों को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। परंतु दोस्तों कभी कभी ऐसा होता है कि हमारी किडनी की समस्याएं इतनी अत्यधिक बढ़ जाती है जिसके कारण हमारी किडनी फेल हो जाती है और किडनी फेलियर की वजह से हमारा शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। शारीरिक कमजोरी का सीधा असर हमारे शरीर के बाकी के अंगों पर पड़ता है और हम किसी भी काम को अच्छी तरह से करने में असफल रहते हैं। कमजोरी की वजह से हमारे शरीर में दिनभर आलसपन बना रहता है और हमारे अंदर स्फूर्ति कमी आ जाती है। कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि हम कमजोरी में अगर कोई काम कर भी लेते हैं तो उसकी वजह से हमारे शरीर के कुछ अंगों में दर्द का अनुभव होने लगता है। और यह दर्द धीरे-धीरे समय के साथ बढ़ता ही जाता है।  दोस्तों आज हम आपको बताएंगे किडनी में हुई समस्याओं के दौरान शरीर में उत्पन्न हुई कमजोरी और दर्द से हम किस प्रकार खुद को दूर रख सकते हैं। हम आज जो नुस्खे आपको बताने जा रहे हैं वह बहुत ही कामयाब और कई लोगों द्वारा आजमाए हुए हैं। आयुर्वेद में काफी सालों के सफल प्रयत्न के बाद इन सभी तरीकों को इजाद किया गया है। यदि आप भी चाहते हैं कि आपके शरीर में किडनी के बीमारी की वजह से उत्पन्न हुई कमजोरी का निवारण सही से हो तो कृपया नीचे दिए गए तरीकों को अपने जीवन में अपनाएं।  ताजे फल एवं सब्जी का सेवन करें- हरी सब्जियां और फलों को अपनी डायट में शामिल करने की सलाह अक्सर आयुर्वेदिक चिकित्सक के द्वारा दी जाती है। ये चीजें न केवल हमें मिनरल और विटामिन जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं, बल्कि उन लोगों की मदद करते हैं, जो अपना वजन घटाना चाहते हैं। फलों में विटामिन-सी, कार्बोहाइड्रेट और रेशे होते हैं, जो मांसपेशियों में ताकत लाते हैं। अगर व्यायाम के बाद फलों के जूस का सेवन किया जाए तो शरीर को जल्द आराम मिलता है। आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का सेवन करें- प्रकृति के द्वारा दिए गए अनेक तोहफों में से आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां अनमोल है। एनर्जी बूस्टर और शरीर को दिनभर ऊर्जावान बनाए रखने के लिए आयुर्वेद में ऐसी बहुत सारी जड़ी बूटी है जिसका कोई भी व्यक्ति इस्तेमाल कर सकता है। आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की खास बात यह है कि अगर आप इन जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करते हैं तो इनका कोई भी साइड इफेक्ट शरीर पर देखने को नहीं मिलता है यह जड़ी बूटियां सिर्फ और सिर्फ व्यक्ति के शरीर को फायदा पहुंचाने का काम करती हैं।  तुलसी, लहसुन, दालचीनी, अश्वगंधा, अदरक, शतावरी जैसी हजारों जड़ी बूटियां आयुर्वेद में मौजूद है जो कि व्यक्ति के लिए एनर्जी बूस्टर का काम कर सकती है। इन जड़ी-बूटियों से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि यह जड़ी बूटियां आपको कहीं भी प्राप्त हो सकती हैं। इन जड़ी-बूटियों को पाने के लिए आपको किसी प्रकार से पैसे को खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। अगर कोई व्यक्ति चाहे तो वह अपने घर में भी इन सभी जड़ी बूटियों को उगा सकता है और इनको प्रयोग में ले सकता है। दोस्तों हम जिन जड़ी बूटियों के बारे में आपको बता रहे हैं वह सिर्फ इसलिए खास नहीं है क्योंकि आयुर्वेद ने यह सिद्ध किया है कि यह जड़ी बूटियां एनर्जी बूस्टर के रूप में उपयोग की जा सकती हैं। बल्कि इन जड़ी बूटियों को इसलिए भी खास माना गया है क्योंकि इन्हीं जड़ी बूटियों का इस्तेमाल कर के आज तक लाखों करोड़ों लोगों ने खुद की शरीर की कमजोरी को दूर किया है। आयुर्वेद को अपना कर न जाने कितने लोगों ने अपने शरीर की ताकत को दोबारा पाया है।  सिर्फ इतना ही नहीं दोस्तों आयुर्वेद ना सिर्फ आपको आपकी कमजोरी से छुटकारा दिलाता है बल्कि किडनी की समस्याओं का भी निवारण भी आयुर्वेद में आपको मिल सकता है। आयुर्वेद में किडनी की हर तरह की समस्या का इलाज मौजूद है।  हमारी सलाह आप सभी के लिए यही है कि अगर आपको को भी किडनी की बीमारी की वजह से शारीरिक कमजोरी हो गई है तो कृपया फालतू की अंग्रेजी दवाओं को छोड़कर आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का उपयोग शुरू करें। हो ना हो बहुत जल्द आपको शरीर में परिवर्तन दिखाई देगा और आपको शरीर के अंदर स्फूर्ति भी महसूस होगी और आप भी रोगमुक्त और खुशहाल जिंदगी जी सकेंगे।

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अपनी किडनी को कैसे स्वस्थ रखें ?

 किडनी किसी भी इंसान के शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होती है। जब किसी कारणवश किसी व्यक्ति की किडनी खराब हो जाती या फिर किसी व्यक्ति की किडनी सही प्रकार से काम करना बंद कर देती है तब ऐसी सम्सस्याओं को किडनी रोग कहा जाता है। आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में किडनी में रोग हो जाना काफी आम बात हो गयी है। किडनी की समस्या इसलिए भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसकी वजह से शरीर के बाकी अंगों को भी असहजता होने लगती है।      किडनी के रोगों से निवारण पाने या फिर उनसे बचने के किए आवश्यक है कि किडनी के रोग के इलाज के साथ साथ हम अपने खानपान पर भी ध्यान दें क्योंकि किडनी की समस्या के दौरान अगर हम परहेजी खाना खाएंगे तो पथरी और किडनी में सूजन जैसी समस्याओं का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। तो आज हम आपको ऐसी 10 चीजों के बारे में बताएंगे जिसके सेवन न करने से आपको किडनी की समस्याओं से बहुत जल्द छुटकारा मिल जाएगा।      1) अधिक मात्रा में चीनी का सेवन न करें-  हाई ब्लड प्रेशर और सुगर की वजह से बहुत से लोगों को किडनी की समस्या हो जाती है। हाई ब्लडप्रेशर और सुगर का सबसे बड़ा कारण है अधिक मात्रा में चीनी का सेवन। तो अगर आपको किडनी रोगों से बचना है तो अधिक मात्रा में चीनी का सेवन बिल्कुल न करें। नाम मात्र चीनी का इस्तेमाल करें। उन सभी उत्पादों से दूरी बनाएं जिसमें चीजी अधिक मात्रा में मौजूद होती है।      2) प्रोसेस्ड फ़ूड न खाएं-   किडनी की समस्याओं से बचने के लिए प्रोसेस्ड फ़ूड न खाने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि प्रोसेस्ड फ़ूड में काफी अधिक मात्रा में सोडियम और फॉस्फोरस मौजूद होता है जोकि किडनी रोगियों के लिए काफी ज्यादा खतरनाक होता है। साइंटिफिक स्टडी के मुताबिक प्रोसेस्ड फूड से अधिक मात्रा में फॉस्फोरस लेने से किडनी स्वस्थ हों तो भी उन्हें नुकसान पहुंच सकता है।     3) धूम्रपान न करें-  धूम्रपान न सिर्फ किडनी की समस्याओं को बढ़ावा देता है बल्कि इंसान के शरीर के बाकी अंगों को भी नष्ट कर देता है। यह तो सब जानते हैं कि धूम्रपान हमारे फेफड़ों और हृदय के लिए काफी नुकसानदेह होता लेकिन क्या आपको पता है धूम्रपान हमारे किडनी को भी उतना ही नुकसान देता है जितना कि फेफड़ों को। इसकी धूम्रपान न करें।      4) पेनकिलर्स का प्रयोग न करें-   आजकल लोगों को जब भी कोई परेशानी होती है तो बिना किसी डॉक्टर की सलाह के लोग मेडिकल स्टोर जाके दावा ले लेते हैं। लेकिन क्या आपको पता है यह दवाएं शायद आपको आपकी समस्या से निज़ाद दिला दें परंतु यही दवाएं आपकी किडनी के लिए काफी हानिकारक होती हैं।      5) शराब के सेवन से बचें-  शराब के सेवन से सबसे ज्यादा हानि अगर शरीर के किसी अंग को होती है तो वो है किडनी। रोजाना दिन में चार बार से ज्यादा शराब पीने वालों में शराब न पीने वालों के मुकाबले किडनी रोग का जोखिम दोगुना होता है। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो शराब के साथ साथ धूम्रपान भी करते हैं, ऐसे लोगों में किडनी रोग होने का खतरा बहुत हद तक बढ़ जाता है। इसलिए जितना हो सके उतनी शराब से दूरी बनाएं।      6) चाय के सेवन से बचें-  चाय का सेवन भी किडनी के रोगियों के लिए अत्यधिक हानिकारक होता है। चाय से पेट से जुड़ी बहुत सी समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती है। अगर आपको चाय पीनी ही है तो नींबू वाली चाय का सेवन करें या फिर ग्रीन टी का सेवन करें।      7) पोटेशियम युक्त खाने से बचें-   किडनी की समस्याओं से पीडि़त किसी भी व्यक्ति को अपने खानपान में से पोटेशियम का सेवन कम करना चाहिए। पोटेशियम की मात्रा को कम करने के लिए फलों और सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए। हालांकि पोटेशियम का सेवन तभी कम करना है, जब इसकी आवश्यकता हो, यह फिर आपकी किडनी का फंग्शन 20 प्रतिशत से भी नीचे चला गया हो।     8) सख्त चीजों के सेवन से बचें-  बीज युक्त आहार, कच्चा चावल, चना इस सभी चीजों के सेवन से किडनी में स्टोन की समस्या उत्पन्न होने की संभावनाएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं। इसलिए आवश्यक है कि किडनी के रोगी सख्त चीजों का सेवन कम से कम करें। जितना अधिक हो सके मुलायम चीजों का सेवन ही करें।      9) घी तेल और मक्खन से दूरी बनाये-  उवयुक्त चीजों के अधिक सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है जोकि किडनी के लिए अच्छा नहीं होता है। घी, तेल और मक्खन में अत्यधिक मात्रा में फैट मौजूद होता है जोकि शरीर के कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।      10) अधिक नमक का सेवन भी न करें-  आप सभी ने सुना होगा कि ज्यादा नमक लीवर के लिए हानिकारक होता है लेकिन हम आपको बता दें कि नमक से किडनी रोग होने की आशंकाओं में भी काफी इजाफा होता है। इसलिए नमक का प्रयोग उतना ही करें जितने की आवश्यकता हो।      तो अगर आपकी किडनी में कोई समस्या है और आपको उस समस्या से छुटकारा पाना हैं तो ऊपर दी गई हुई चीजों के सेवन से खुद को दूर रखें। अगर आप ऐसा करने में सफल हो पाते हैं तो जरूर ही आपको अपने किडनी रोग से छुटकारा मिलेगा। हालांकि ऊपर सूची में ऐसी बहुत सी चीजें है जो हम रोजाना खाने में इस्तेमाल करते हैं और उन्हें छोड़ना काफी मुश्किल होता है। लेकिन अगर आपको अपने जीवन को स्वस्थ रखना है, अपनी किडनी को स्वस्थ रखना है तो आपको यह बलिदान देना होगा और अपने खाने पर कंट्रोल करना पड़ेगा। डॉक्टर्स का भी यही मानना है कि अगर लोग अपने खाने पीने को पूरी तरह बैलेंस रखे तो लोगों की बहुत सारी परेशानियां इसी से हो सकती है क्योंकि खानपान का सीधा असर हमारे शरीर के अंगों पर पड़ता है।    तो अगर आप अपने जीवन को स्वस्थ एवं आनंदमयबनाना चाहते हैं तो ऊपर दी गई हुई बातों पर ध्यान दें और स्वस्थ रहें।  

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आयुर्वेद किन तरीकों से एलोपैथ से बेहतर है

पिछले काफी समय से लोगों के मन में यह प्रश्न काफी तेजी से पनप रहा है कि बीमारी से लड़ने में आयुर्वेद ज्यादा बेहतर है या फिर एलोपैथी। काफी लोग ऐसे हैं जो बीमारी से तुरंत निजात पाना चाहते हैं और इसलिए वो एलोपैथी का इलाज अपनाते हैं। एलोपैथी के इलाज से उनको तुरंत लाभ हो जाता है और इसीलिए वह सबके सामने एलोपैथी को बेहतर बताने की कोशिश करते हैं लेकिन वह लोग जो पिछले काफी समय से आयुर्वेद पर निर्भर है उन्हें पता है कि आयुर्वेद की असली खासियत क्या है। आयुर्वेद विश्व का सबसे पुराना इलाज है। आयुर्वेद में ऐसी ऐसी खतरनाक बीमारियों का सफल इलाज मिल गया है जो कि आज तक एलोपैथी ढूंढ भी नहीं पाई है। दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि आयुर्वेद किन तरीकों से एलोपैथ से बेहतर ही नहीं बल्कि बहुत बेहतर है। आयुर्वेद का इतिहास 5000 साल से ज्यादा पुराना है-- दोस्तों आयुर्वेद के इलाज को हम विश्वसनीय इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पिछले लगभग 5000 सालों से विश्व भर के अलग-अलग हिस्सों में आयुर्वेद के द्वारा निर्मित जड़ी बूटियों का इस्तेमाल होता चला आ रहा है।इतिहास गवाह है कि आज तक कभी किसी ने आयुर्वेद पर किसी भी प्रकार से उंगली नहीं उठाई है। जिस व्यक्ति ने जीवन में आयुर्वेद को अपनाया है वह आज एकदम तंदुरुस्त और स्वस्थ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 5000 साल पहले तो आयुर्वेद का जन्म हुआ है लेकिन उससे पहले भी लोग बीमारी से छुटकारा पाने के लिए जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करते थे और वो जड़ी बूटियां अब आयुर्वेद की दवाइयां बनाने में इस्तेमाल की जाती है। जिस भी व्यक्ति को इतिहास में आयुर्वेद के द्वारा किए गए चमत्कारों के बारे में पता है वह कभी भी आयुर्वेद का त्याग नहीं कर सकता। आयुर्वेद समस्या को जड़ से मिटाने में कारगर है-- पिछले 5000 सालों से आयुर्वेद सिर्फ इसलिए सफल नहीं है क्योंकि आयुर्वेद की दवाइयां जड़ी बूटियों से निर्मित होती हैं, बल्कि इसलिए भी सफल है क्योंकि आयुर्वेद जिस भी समस्या का निदान करता है उसे जड़से मिटा देता है। दोस्तों कई बार ऐसा होता है कि अगर आपको कोई बीमारी है तो आप दुकान पर जाकर अंग्रेजी दवाइयां ले लेते हैं और उसे खा लेते हैं। आपको हो सकता है कि कुछ समय के लिए उस बीमारी से छुटकारा मिल जाए। लेकिन कुछ समय बाद फिरसे आप देखेंगे कि वही बीमारी दोबारा आपके शरीर में पनपने लगी है। परंतु दूसरी तरफ अगर आप अपनी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए आयुर्वेद की शरण में जाते हैं तो इस बात की गारंटी है कि आयुर्वेद अगर उस समस्या का इलाज करेगा तो उसे जड़ से मिटा देगा। अगरआपके पास ऐसा कोई व्यक्ति रहता है जिसने आयुर्वेद में अपना इलाज करवाया है तो उससे एक बार पूछियेगा जरूर। वह व्यक्ति आपको बताएगा कि उसकी बीमारी को आयुर्वेद में जड़ से खत्म किया है। आयुर्वेदिक दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता-- एक और सबसे खास बात जो कि आयुर्वेद को एलोपैथी से अलग बनाती है वो यह है कि आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से निर्मित दवाओं का कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता। अंग्रेजी दवाओं के इस्तेमाल से शरीर पर बहुत बुराअसर पड़ता है। कई बार यह देखने को मिला है कि जब कभी कोई व्यक्ति अपनी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए अंग्रेजी दवा का इस्तेमाल करता है तो उस व्यक्ति को उस बीमारी से तो छुटकारा मिल जाता है लेकिन अंग्रेजी दवाओं के सेवन से उसके शरीर पर ऐसा असर होता है कि उसके शरीर में किसी नई बीमारी का जन्म हो जाता है। और तो और वह नहीं बीमारी पुरानी वाली समस्या से भी ज्यादा खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अंग्रेजी दवाओं में खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल किया जाताहै। दूसरी तरफ अगर बात की जाए आयुर्वेदिक दवाओं की तो आयुर्वेदिक दवाई जड़ी बूटियों से बनाई जाती है। अगर बाई चांस आयुर्वेदिक दवा आपको फायदा नहीं कर रही है तो यह भी शत प्रतिशत सत्य है कि वह आपको किसी भी प्रकार से नुकसान भी नहीं पहुंचाएगी। आज तक इतिहास गवाह है कि आयुर्वेदिक दवा की वजह से किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं सहना पड़ा है। अगर किसी व्यक्ति को आयुर्वेद मेंभरोसा है तो यह बात तय है कि उसे फायदा ही होगा। अब भी एलोपैथी संक्रमणों से निपटने में सबसे प्रभावी है, इसमें कोई शक नहीं है। मगर मनुष्य की ज्यादातर बीमारियां खुद की उत्पन्न की हुई होती हैं। वे शरीर के अंदर उत्पन्न होते हैं। ऐसी पुरानी बीमारियों के लिए, एलोपैथी चिकित्सा बहुत कारगर साबित नहीं हुई है। एलोपैथी से बीमारी को सिर्फ संभाला जा सकता है। वह कभी बीमारी को जड़ से खत्म नहीं करती क्योंकि मुख्य रूप से इसमें लक्षणों का इलाज किया जाता है। वहीं दूसरी तरफ अगर आयुर्वेद की बात की जाए तो आज भी आयुर्वेद खतरनाक से खतरनाक बीमारियों से लड़ने में अत्यंत सहायक है। आयुर्वेद से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि सबसे पहले आयुर्वेद रोग को संभालता है यानी कि उसको कंट्रोल में करता है और उसके बाद धीरे-धीरे उसकी जड़ को काटना शुरू कर देता है और अंत में शरीर में रोग को जड़ से खत्म कर देता है। आयुर्वेद हमारे शरीर में ऐसे जीवाणुओं को जन्म दे देता है जो कि उस रोग को दोबारा हमारे शरीर में आने का मौका ही नहीं देते। इसलिए दोस्तों हमारा आपसे यही कहना है कि अगर आपको किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो बिना विचार किए आयुर्वेद में अपनी उस समस्या का समाधान ढूंढने। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एक बार अगर आयुर्वेद को आपने अपना लिया तो बहुत ही जल्द आपको आपकी शारीरिकसमस्या से तो छुटकारा मिल जाएगा। साथ ही साथ आयुर्वेद यह भी निश्चित करता है कि वह समस्या आपको आपके जीवन में कभी दोबारा ना देखनी पड़े।हम यह नहीं कह रहे हैं कि एलोपैथी का इलाज कारगर नहीं है या फिर खराब है लेकिन हम यह जरूर कह रहे हैं कि आयुर्वेद हर मामले में एलोपैथी से बेहतर था बेहतर है और आगे भी बेहतर ही रहेगा।

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आयुर्वेद की मदद से रोग-प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ाये ?

 तेजी से बदल रही इस दुनिया में आज हर कोई भाग रहा है और इस भागदौड़ में अगर कुछ है जो पीछे छूट जा रहा है तो वो है लोगों का स्वास्थ्य। आज जिसे देखो वो बीमार है किसी न किसी बीमारी से। किसी को एलर्जी है तो किसी को अस्थमा, किसी को डायबिटीज है तो किसी को कैंसर। सोचने वाली सबसे अजीब बात ये है कि इतनी तेजी से विकसित हो रही इस दुनिया मे जब तकनीक और विज्ञान का दौर अपने चरम पर है तो हर साल लोग इतनी ज्यादा संख्या में कैसे बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। इसका सही जवाब है लोगों की कमजोर होती इम्युनिटी। इम्युनिटी का मतलब होता है रोग्य प्रतिरोधक क्षमता।      इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता हमारे शरीर में किसी भी प्रकार के रोग को होने से बचाती है। अगर किसी व्यक्ति की इम्युनिटी कमजोर है तो वह जल्द ही बीमारियों का शिकार हो जाता है। उसका शरीर होने वाली बीमारियों से लड़ नहीं पाता है जबकि जिस व्यक्ति की इम्युनिटी मजबूत होती है उसको बीमारियां का खतरा कम रहता है। इसलिए जरूरी है कि काम के साथ साथ अपनीइम्युनिटी को भी मजबूत रखें और ये होता है अच्छे खान पान से योगा से और व्यायाम से।     अब सवाल ये उठता है कि जो लोग शारीरिक रूप से पहले से ही बीमार हैं यानी जिंदगी इम्यूनिटी कमजोर है और समय-समय पर कोई न कोई बीमारी होती रहती है इम्यूनिटी को कैसे मजबूत किया जाए? इम्युनिटी को बढ़ाना यानी कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। किसी भी उम्र का व्यक्ति इस काम को बखूबी अंजाम दे सकता है जरूरत है बस कुछ नियमों का सही प्रकार से अनुसरण करने की। दोस्तों आप में से अगर कोई ऐसा है जिसे लगता है कि उसकी इम्युनिटी कमजोर है तो आज हम आपको कुछ ऐसे लाजवाब तरीकों के बारे मेंबताने जा रहे हैं जिनकी मदद से आपकी इम्युनिटी बहुत जल्द मजबूत हो जाएगी।            जो भी व्यक्ति अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहता है उसे आयुर्वेद को अपनाना होगा। आयुर्वेद में ऐसी हजारों तरह की जड़ी बूटियां मौजूद है जो कि इंसान के शरीर की इम्युनिटी को अत्यधिक मजबूत बनाने में सक्षम है। आजकल होता क्या है कि जब भी इंसान को कोई बीमारी होती है तो वह तुरंत ही अंग्रेजी दवाओं का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है। अंग्रेजी दवाएं नासिर्फ शरीर पर साइड इफेक्ट छोड़ देती हैं बल्कि व्यक्ति के शरीर की इम्युनिटी को भी काफी कमजोर कर देती है। और आजकल तो हालत यह हो गई है कि व्यक्ति रोज किसी न किसी बीमारी के लिए किसी ना किसी प्रकार की अंग्रेजी दवा का इस्तेमाल करता है तो आप खुद सोच कर देखिए कि इन दवाओं का आपके शरीर की इम्युनिटी पर कितना बुरा असर पड़ रहा होगा। व्यक्ति को मालूम भी नहीं पड़ता और उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे खत्म होती चली जाती है।      इसलिए दोस्तों हमारा आप सभी के लिए यही सुझाव है कि अगर आपको किसी भी तरह की समस्या है या फिर कोई बीमारी है तो सबसे पहले उस बीमारी का इलाज आयुर्वेद में खोजें। आयुर्वेद में आज हर तरह की बीमारी का सफल इलाज मौजूद है। आयुर्वेद की दवाइयों की सबसे खास बात यह है कि सभी आयुर्वेदिक दवाइयां जड़ी बूटियों द्वारा निर्मित होती है और इसी वजह से इनका व्यक्ति के शरीर पर किसी भी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं होता है। बल्कि इन दवाओं के इस्तेमाल से शरीर की इम्युनिटी और ज्यादा मजबूत होती चली जाती है। हर आयुर्वेदिक औषधि में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं जो कि आप के रोग से तो लड़ने की ताकत रखती है, साथ ही साथ आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में कारगर सिद्ध होती हैं।      आयुर्वेदिक औषधियों में आमतौर पर अश्वगंधा, तुलसी, पुदीना, दालचीनी, कपूर, लौंग, सफेद कमल, हल्दी, लेमन ग्रास जैसी जड़ी बूटियों का प्रयोग होता है। दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बहुत सारे शोध के अनुसार यह साबित किया जा चुका है कि उपयुक्त सभी जड़ी बूटियां व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बहुत ही तेजी से बढ़ाती हैं। आयुर्वेद में बनाई गई हर दवाई के पीछे सिर्फ यही एक कारण नहीं होता है कि वह दवा शरीर के रोग को दूर करेगी बल्कि दूसरा कारण यह भी होता है कि उस दवा के इस्तेमाल से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी इजाफा हो। और इसी कारण से उसमें कुछ ऐसी जड़ी बूटियां भी मिलाई जाती हैं जो कि मुख्यता व्यक्ति के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कारगर होती हैं।      हल्दी, दालचीनी, कालीमिर्च, सूखी अदरक और मुनक्का जैसी जड़ी बूटियों से निर्मित हर्बल चाय के सेवन से भी व्यक्ति अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बहुत तेजी से बढ़ावा दे सकता है। हल्दी वाला दूध पीने से भी व्यक्ति की इम्युनिटी काफी तेजी से बढ़ती है। हमने जितनी भी जड़ी बूटियों के सेवन के बारे में आपको बताया है उन सभी जड़ी बूटियों का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। इन सभी जड़ी बूटियों को लोग कई हजारों सालों से इस्तेमाल कर रहे हैं और स्वस्थ भी हैं। यह जड़ी बूटियों सिर्फ और सिर्फ व्यक्ति के शरीर को फायदा पहुंचाती हैं।      दोस्तों तो अगर आप भी अपनी इम्युनिटी को बेहतर एवं मजबूत बनाना चाहते हैं तो आज से ही हमारी बताई हुई आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का इस्तेमाल शुरू करें और आप देखेंगे कि बहुत ही जल्द आपको आपके शरीर में बदलाव नजर आने लगेगा। आपको स्वस्थ महसूस होगा। आपको इस बात का एहसास होगा कि आपके शरीर में काम करने के लिए भरपूर एनर्जी है, भरपूर ताकत है। भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए आयुर्वेद की जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। दोस्तों, यदि आप भी अपनी इम्यूनिटी, अपने शरीर की रोग प्रतिरोधकक्षमता को बढ़ाना चाहते हैं तो आज ही आयुर्वेद को अपने जीवन में अपनाएं।क्योंकि आयुर्वेद में ही ऐसे उपाय मौजूद हैं जो कि आप को इस समस्या से निजात दिला सकते है।  

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क्यों किडनी की बीमारी के इलाज के लिए आयुर्वेद का चयन करें

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां पिछले कई शताब्दियों से लोगों को अनेक प्रकार की बीमारियों से बचाती रहीं हैं। इसके बावजूद आज आलम यह है कि लोग आयुर्वेद की खासियत को नजरअंदाज कर के एलोपैथी के बिछाए दलदल में फंसते चले जा रहे हैं। लोगों को इस बात का बिल्कुल भी एहसास नहीं है कि अंग्रेजी दवाएं उनके शरीर को अंदर से खोखला कर रहीं हैं। जिन लोगों को इस बारे में पता है कि अंग्रेजी दवाएं उनके शरीर के लिए हानिकारक होती है वह भी इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं। और ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि अंग्रेजी दवाएं तुरंत असर दिखाना शुरू कर देती है, उसमें इतने खतरनाक केमिकल होते हैं कि जो शरीर में पहुंचते ही रोग से लड़ने की क्षमता रखते हैं। यही तेजी अंग्रेजी दवाओं के हानिकारक होने का सबूत होती है क्योंकि रोग को जल्द से जल्द ठीक करने के लिए अंग्रेजी दवाओं के निर्माता उसमें खतरनाक केमिकल मिलाते हैं जो आपके शरीर को उस रोग से तो ठीक कर देता है जिसके लिए आपने दवा का इस्तेमाल किया है, लेकिन कई और रोगों को जन्म दे जाता है। किडनी की समस्या:- आज हम आपको बताएंगे कि क्यों किडनी की बीमारी के लिए आयुर्वेद को चुनना आपके लिए सही साबित हो सकता है। यह तो हम सभी जानते हैं कि आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खानपान की वजह से लोगों का शरीर बीमारियों का घर बन चुका है। किडनी की बीमारी उन बीमारियों में से एक है जो कि इंसान के शरीर के अंदर बहुत ही तेजी से पनपती है। अगर सही समय पर किडनी की बीमारी का इलाज न किया गया तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। दोस्तों यह तो हम सभी जानते हैं कि किडनी हमारे शरीर का कितना महत्वपूर्ण अंग होता है। जिस प्रकार से एक गाड़ी का इंजन उस गाड़ी के लिए सब कुछ होता है उसी प्रकार किडनी भी हमारे शरीर के लिए एक गाड़ी के इंजन के समान ही महत्वपूर्ण है। इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी किडनी को सुरक्षित रखें और उसे किसी भी बीमारी की जकड़ में आने से बचाएं। परंतु कई बार ऐसा होता है कि हम अपना ध्यान सही से नहीं रख पाते और उसी वजह से हमें कुछ बीमारियों का सामना करना पड़ता है। किडनी की बीमारियां भी उन्हीं समस्याओं में शामिल है जो कि लापरवाही के कारण शुरू होती है। अगर कोई व्यक्ति सही समय पर किडनी का सही इलाज ना करवाए तो अंत में उसे किडनी फेलियर या फिर किडनी ट्रांसप्लांट का सामना भी करना पड़ सकता है। और आप सभी जानते हैं कि आजकल इलाज कितना महंगा हो गया है किडनी ट्रांसप्लांट में लाखों रुपए लग जाते हैं। अमीर आदमी तो किडनी ट्रांसप्लांट जैसा महंगा ट्रीटमेंट करवा सकता है लेकिन मिडिल क्लास और गरीबों के लिए तो यह करवाना नामुमकिन है। अंग्रेजी दवाओं का मूल्य दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। किडनी की समस्या के लिए आयुर्वेद में मौजूद है रामबाण इलाज:- इसलिए दोस्तों हमारा सुझाव यह है कि अगर आपको किडनी में किसी भी प्रकार की समस्या है तो एलोपैथी को छोड़कर आयुर्वेद की तरफ बढ़े। पिछले कई दशकों से आयुर्वेद में किडनी की समस्याओं का सफल इलाज होता चला आ रहा है। आयुर्वेद ने किडनी के लगभग हर रोग की दवा का आविष्कार कर लिया है। आयुर्वेद से जुड़ी सबसे खास बात क्या है कि सभी आयुर्वेदिक औषधियां, जड़ी बूटियों की मदद से बनाई जाती है और इन औषधियों का इंसान के शरीर पर किसी भी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिलता है। वहीं दूसरी तरफ अगर अंग्रेजी दवाओं की बात की जाए तो अगर कोई व्यक्ति किडनी के रोग से उभरने के लिए अंग्रेजी दवाओं का सेवन कर रहा है तो हो सकता है उसे किडनी की समस्या से छुटकारा मिल जाए लेकिन कुछ समय बाद आप पाएंगे कि उन अंग्रेजी दवाओं की वजह से उस व्यक्ति के शरीर में किसी और रोग ने जन्म ले लिया है। आयुर्वेद की दवा किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले घातक तत्वों को भी बेअसर करती है। अभी हाल में ही भारत के कोलकाता शहर में एक विज्ञान मेले का आयोजन हुआ था जहां पर किडनी के रोगों में आयुर्वेदिक औषधियों के प्रभाव के बारे में चर्चा की गई थी और यह बात साबित हुई कि किडनी के रोग के लिए आयुर्वेद एक सफल और सस्ता इलाज देता है। भारत के बहुत से आयुर्वेदिक चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का भी यह मानना है कि किडनी से संबंधित रोगों में अगर कोई व्यक्ति आयुर्वेद की औषधियां इस्तेमाल करता है तो उसको अवश्य ही उन रोगों से निपटने में सफलता मिलेगी। और दूसरी तरफ यह बात तो कई दशकों से साबित हो चुकी है कि आयुर्वेदिक दवाओं का इंसान के शरीर पर किसी भी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। पुनर्नवा, गोछुरा, हल्दी, चंदन, वरुण, पलाश का पेड़, गुड्डुची जैसी अनगिनत जड़ी बूटियों से निर्मित आयुर्वेदिक औषधियां आजकल आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर पर मौजूद है जो कि आपको किडनी के रोगों से मुक्त कर सकती हैं। हमारी सलाह आपको यही है कि एक बार आप अपने किडनी रोग से संबंधित समस्याओं को जाकर किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक के साथ साझा करें और उनके आदेशानुसार आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के सेवन को प्रारंभ करें। आप बहुत जल्द ही अपने स्वास्थ्य में बदलाव को महसूस करेंगे। आयुर्वेद करता है सस्ता और सटीक इलाज:- एक और बात जो आयुर्वेदिक औषधियों को अंग्रेजी दवाओं से ऊपर रखती है वह यह है कि आयुर्वेद का इलाज, एलोपैथी के इलाज के कंपेयर में बहुत ही सस्ता होता है। एलोपैथी में आपको रोजाना अलग-अलग प्रकार की दवाओं का सेवन करना पड़ेगा जो कि आपके किडनी के लिए तो फायदेमंद होंगी लेकिन उन दवाओं में ऐसे ऐसे केमिकल मौजूद होते हैं जो आपके शरीर के बाकी के अंगों को कमजोर बना देंगे। वहीं दूसरी तरफ आयुर्वेदिक औषधियों में ऐसे कोई भी केमिकल मौजूद नहीं होते हैं। सभी प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं जड़ी बूटियों की मदद से बनाई जाती है जो कि धरती में उगती हैं। और तो और आयुर्वेद का इलाज भी काफी सस्ता होता है। दोस्तों अगर आप में से कोई भी किडनी की समस्याओं से पीड़ित है, आपके परिवार में या फिर आपके दोस्तों में कोई ऐसा है जिसे किडनी की समस्या है तो हमारा सुझाव यही है एलोपैथी में इलाज ढूंढने की बजाय आप आयुर्वेद में किडनी का इलाज करवाएं क्योंकि आयुर्वेद ने पिछले कई सालों से कई लोगों का सफल इलाज किया है। जिन जिन लोगों का इलाज हुआ है उनमें से बहुत से लोगों के पॉजिटिव फीडबैक भी देखने को मिले हैं। यदि आपको भी अपना स्वास्थ्य और अपनी अपनी किडनी को सुरक्षित रखना है तो आज ही आयुर्वेद से जुड़े।

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क्या बच्चों के लिए आयुर्वेदिक मेडिसिन सेफ है ?

भारत में दिन प्रतिदिन आयुर्वेदिक दवाओं का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। लोग एलोपैथिक दवाओं को छोड़कर आयुर्वेद की तरफ बढ़ते हुए नजर आ रहे हैं। देरी से ही सहीए परंतु लोगों को यह समझ में आने लगा है कि एलोपैथिक दवाएं उनके शरीर पर हानिकारक असर करती हैं जिसकी वजह से उनके शरीर में बहुत सी तरह तरह की बीमारियों उत्पन्न हो जाती है।  आयुर्वेदिक दवाएं पूरी तरह से जड़ी बूटियों की मदद से बनाई जाती हैं और इसलिए यह मनुष्य के शरीर के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक और सेफ्टी के लिहाज से भी काफी अच्छी होती हैं। परंतु आजकल लोगों के मन में एक नए प्रकार का प्रश्न उभर रहा है। कई लोगों ने हमसे भी यह प्रश्न किया है। प्रश्न यह है कि क्या आयुर्वेदिक दवाएं बच्चों के लिए सेफ है? किसी भी चीज के संदर्भ में उठने वाले सभी प्रकार के प्रश्न जायज होते हैं और अब आयुर्वेदिक दवाइयों के ऊपर उठ रहा है यह प्रश्न भी एक तरह से लाजमी है। कोई भी माता.पिता अपने बच्चों को जब कोई चीज खाने के लिए देता है तो उसे अपने बच्चे को देने से पहले उसकी हर तरह से जांच कर लेता है और यहां पर तो बात दवाइयों की हो रही है।   मार्केट में मिलने वाली आज कल बहुत सी दवाइयां ऐसी होती हैं जिनमें तरह तरह के केमिकल होते हैं और अगर उनका गलत डोज़ बच्चे को दे दिया जाए तो वह शरीर के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। परंतु जैसा कि हमने आपको बताया आयुर्वेदिक दवाओं में केमिकल तभी मिलाया जाता है जब उसकी बहुत ही ज्यादा जरूरत हो और इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि वह केमिकल इतनी मात्रा में दवा में ना डाला जाए कि किसी भी व्यक्ति के शरीर को उससे नुकसान हो।   वहीं दूसरी तरफ अगर बात की जाए एलोपैथिक दवाओं की तो उन दवाओं को बनाते वक्त इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता कि जो भी व्यक्ति उस दवा को खाने वाला है उसको परेशानी ना हो बल्कि इस बात का ध्यान रखा जाता है कि जिस बीमारी के लिए वह दवा बनाई जा रही है उस बीमारी को कितनी जल्दी मनुष्य के शरीर से दूर करें और इसी फास्ट रिएक्शन के लिए उन दवाओं में तरह तरह के केमिकल को मिला दिया जाता है।  एलोपैथिक दवाई बच्चों के लिए तो बहुत ही ज्यादा हानिकारक होती हैं क्योंकि बच्चों की इम्युनिटी काफी तेज होती है और हर प्रकार के केमिकल जल्दी से उनके शरीर में घुल जाते हैं और नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं जिससे उनकी इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। हमने अक्सर यह देखा है कि जिन बच्चों को बचपन में ज्यादा दवाइयां खिलाई जाती हैं वह आगे चलकर बहुत बीमार पड़ने लगते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बिल्कुल कम हो जाती हैं।  दूसरी तरफ सारी आयुर्वेदिक दवाएं जड़ी बूटियों से निर्मित होती है और अगर कोई भी बच्चा गलती से दवाओं का ओवरडोज भी ले लेता है तो भी उसे कोई बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होने वाला है क्योंकि जड़ी बूटियों ने आज तक कभी भी किसी को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया है। जैसा कि हम ने बताया कि बड़ों के मुक़ाबले बच्चों में दवाइयों का रिएक्शन होने की ज़्यादा संभावना होती है।  आयुर्वेद में मौजूद दवाइयों के गुणों को किसी भी प्रकार से नकारा नहीं जा सकता है। इसमें कई बड़े बड़े रोगों को ठीक करने की क्षमता है। इनमें से कई दवाइयां बच्चों के लिए बहुत ही फायदेमंद और असरदार होती है लेकिन कुछ ऐसी आयुर्वेदिक दवाइयां भी हैं जो आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए हम आपको यह सुझाव देना चाहते हैं कि आप जब भी किसी बच्चे को कोई दवा दे रहे हो तो एक बार हमारे आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।  यह बात तो सभी को पता है कि बिना सुझाव और सलाह के किसी भी चीज का इस्तेमाल करना सही बात नहीं है और दवा तो हमें जीवन में कभी भी बिना किसी चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए। अगर बात बच्चों को दवा देने की है तो सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप पहले किसी आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श ले लें उसके बाद चिकित्सक के आदेश के अनुसार बच्चों को दवा का सेवन करवाएं।  आयुर्वेद में कुछ ऐसी औषधियां है जो कि बच्चों के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक होती है इसलिए जब भी कभी आप हमारे आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर पर आते हैं तो सबसे पहले मेडिकल स्टोर वाले आपसे यही बात पूछते हैं कि आप यह दवा किस उम्र के व्यक्ति के लिए ले रहे हैं। मेडिकल स्टोर पर मौजूद चिकित्सक को यह पता होता है कि बच्चों के लिए कौन सी दवा फायदेमंद रहेगी और कौन सी हानिकारक।  जयपलाए स्नुहिए विषमुष्टिध्तिन्दुकध्लकुचए दन्तीए पारसीक यवानीए अहिफेनएभांगए करवीरए अर्कएधतूराए वत्सनाभ गुंजाए सर्पविषए भल्लातकए श्रिंगीविशए लांगली जैसी कुछ जड़ी बूटियां आयुर्वेद में मौजूद है जो कि बच्चों के सेहत के लिए अच्छी नहीं होती है। कम उम्र के बच्चों को इन जड़ी.बूटियों से युक्त दवाएं ना ही दें तो बेहतर है।  परंतु हमारा सुझाव आप सभी लोगों के लिए यही है कि अगर आपके बच्चे को किसी भी प्रकार की समस्या है तो एलोपैथिक दवाओं के तरफ भागने से पहले एक बार आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में जरूर सोचें क्योंकि आयुर्वेदिक दवाएं रोग को पूरी तरह से नष्ट करने की क्षमता रखती हैं। बच्चों को शुरू से ही आयुर्वदिक दवाओं की आदत डालनी चाहिए जिससे आगे चलकर वह अंग्रेजी दवाओं की तरफ भागने से पहले आयुर्वेदिक दवाओं और उसके लाभ के बारे में जानते रहे।  बड़े.बड़े आयुर्वेदिक चिकित्सकों का यही मानना है कि आयुर्वेदिक दवाएं बच्चों के शरीर के लिए काफी अच्छी होती है क्योंकि आयुर्वेदिक दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। साथ ही साथ आयुर्वेदिक दवाओं से जुड़ी एक सबसे महत्वपूर्ण चीज यह है कि यह रोग को पूरी तरह से खत्म करने की क्षमता रखती है। मतलब अगर आप अपने बच्चे को किसी भी रोग से लड़ने के लिए आयुर्वेद की कोई दवा दे रहे हैं तो आप इस बात का विश्वास रखिए कि अगर एक बार वह रोग आयुर्वेदिक दवाओं की मदद से सही हो गया तो फिर दोबारा आपके बच्चे को वह रोग शायद ही कभी परेशान करेगा।  इसलिए आवश्यक है कि आप अपने बच्चे को बचपन से ही आयुर्वेदिक औषधियों की आदत डलवाएं। अगर शुरू से ही अच्छी आदत लग जाएगी तो जीवन भर उसे साथ नहीं छूटेगा। आयुर्वेद का वरदान भारत को मिला है तो आवश्यक है कि भारत की आने वाली युवा पीढ़ी आयुर्वेद की मदद से और आयुर्वेद के इस्तेमाल से स्वस्थ रहें। 

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किडनी को सुरक्षित रखने के लिए 10 खाद्य पदार्थों से बचें

किडनी किसी भी इंसान के शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होती है। जब किसी कारणवश किसी व्यक्ति की किडनी खराब हो जाती है या फिर किसी व्यक्ति की किडनी सही प्रकार से काम करना बंद कर देती है तब ऐसी सम्सस्याओं को किडनी रोग कहा जाता है। आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में किडनी रोग हो जाना काफी आम बात हो गयी है। किडनी की समस्या इसलिए भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसकी वजह से शरीर के बाकी अंगों को भी असहजता होने लगती है।  किडनी के रोगों से निवारण पाने या फिर उनसे बचने के किए आवश्यक है कि किडनी के रोग के इलाज के साथ साथ हम अपने खानपान पर भी ध्यान दें क्योंकि किडनी की समस्या के दौरान अगर हम कुछ परहेज का खाना खाएंगे तो पथरी और किडनी में सूजन जैसी समस्याओं का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। तो आज हम आपको ऐसी 10 चीजों के बारे में बताएंगे जिसके सेवन न करने से आपको किडनी की समस्याओं से बहुत जल्द छुटकारा मिल जाएगा।  1:- अधिक मात्रा में चीनी का सेवन न करें. हाई ब्लड प्रेशर और सुगर की वजह से बहुत से लोगों को किडनी की समस्या हो जाती है। हाई ब्लडप्रेशर और सुगर का सबसे बड़ा कारण है अधिक मात्रा में चीनी का सेवन। तो अगर आपको किडनी रोगों से बचना है तो अधिक मात्रा में चीनी का सेवन बिल्कुल न करें। नाम मात्र चीनी का इस्तेमाल करें। उन सभी उत्पादों से दूरी बनाएं जिसमें चीजी अधिक मात्रा में मौजूद होती है।  2:- प्रोसेस्ड फ़ूड न खाएं. किडनी की समस्याओं से बचने के लिए प्रोसेस्ड फ़ूड न खाने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि प्रोसेस्ड फ़ूड में काफी अधिक मात्रा में सोडियम और फॉस्फोरस मौजूद होता है जोकि किडनी रोगियों के लिए काफी ज्यादा खतरनाक होता है। साइंटिफिक स्टडी के मुताबिक प्रोसेस्ड फूड से अधिक मात्रा में फॉस्फोरस लेने से किडनी स्वस्थ हों तो भी उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। 3:- धूम्रपान न करें. धूम्रपान न सिर्फ किडनी की समस्याओं को बढ़ावा देता है बल्कि इंसान के शरीर के बाकी अंगों को भी नष्ट कर देता है। यह तो सब जानते हैं कि धूम्रपान हमारे फेफड़ों और हृदय के लिए काफी नुकसानदेह होता लेकिन क्या आपको पता है धूम्रपान हमारे किडनी को भी उतना ही नुकसान देता है जितना कि फेफड़ों को। इसलिए धूम्रपान न करें।  4:- पेनकिलर्स का प्रयोग न करें. आजकल लोगों को जब भी कोई परेशानी होती है तो बिना किसी डॉक्टर की सलाह के लोग मेडिकल स्टोर पर जाकर दावा ले लेते हैं। लेकिन क्या आपको पता है यह दवाएं शायद आपको आपकी समस्या से निज़ाद दिला दें परंतु यही दवाएं आपकी किडनी के लिए काफी हानिकारक होती हैं।  5:- शराब के सेवन से बचें. शराब के सेवन से सबसे ज्यादा हानि अगर शरीर के किसी अंग को होती है तो वो है किडनी। रोजाना दिन में ज्यादा शराब पीने वालों में शराब न पीने वालों के मुकाबले किडनी रोग का जोखिम दोगुना होता है। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो शराब के साथ साथ धूम्रपान भी करते हैंए ऐसे लोगों में किडनी रोग होने का खतरा बहुत हद तक बढ़ जाता है। इसलिए जितना हो सके उतनी शराब से दूरी बनाएं।  6:- चाय के सेवन से बचें. चाय का सेवन भी किडनी के रोगियों के लिए अत्यधिक हानिकारक होता है। चाय से पेट से जुड़ी बहुत सी समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती है। अगर आपको चाय पीनी ही है तो नींबू वाली चाय का सेवन करें या फिर ग्रीन टी का सेवन करें।  7:- पोटेशियम युक्त खाने से बचें. किडनी की समस्याओं से पीडि़त किसी भी व्यक्ति को अपने खानपान में से पोटेशियम का सेवन कम करना चाहिए। पोटेशियम की मात्रा को कम करने के लिए फलों और सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए। हालांकि पोटेशियम का सेवन तभी कम करना हैए जब इसकी आवश्यकता होए यह फिर आपकी किडनी का फंग्शन 20 प्रतिशत से भी नीचे चला गया हो। 8:- सख्त चीजों के सेवन से बचें. बीज युक्त आहारए कच्चा चावलए चना इस सभी चीजों के सेवन से किडनी में स्टोन की समस्या उत्पन्न होने की संभावनाएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं। इसलिए आवश्यक है कि किडनी के रोगी सख्त चीजों का सेवन कम से कम करें। जितना अधिक हो सके मुलायम चीजों का सेवन ही करें।  9:- घी तेल और मक्खन से दूरी बनाये. उपयुक्त चीजों के अधिक सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है जो कि किडनी के लिए अच्छा नहीं होता है। घीए तेल और मक्खन में अत्यधिक मात्रा में फैट मौजूद होता है जो कि शरीर के कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।  10:- अधिक नमक का सेवन भी न करें. आप सभी ने सुना होगा कि ज्यादा नमक लीवर के लिए हानिकारक होता है लेकिन हम आपको बता दें कि नमक से किडनी रोग होने की आशंकाओं में भी काफी इजाफा होता है। इसलिए नमक का प्रयोग उतना ही करें जितने की आवश्यकता हो।  अगर आपकी किडनी में कोई समस्या है और आपको उस समस्या से छुटकारा पाना हैं तो ऊपर दी गई हुई चीजों के सेवन से खुद को दूर रखें। अगर आप ऐसा करने में सफल हो पाते हैं तो जरूर ही आपको अपने किडनी रोग से छुटकारा मिलेगा। हालांकि ऊपर सूची में ऐसी बहुत सी चीजें है जो हम रोजाना खाने में इस्तेमाल करते हैं और उन्हें छोड़ना काफी मुश्किल होता है लेकिन अगर आपको अपने जीवन को स्वस्थ रखना हैए अपनी किडनी को स्वस्थ रखना है तो आपको यह बलिदान देना होगा और अपने खाने पर कंट्रोल करना पड़ेगा।  डॉक्टर्स का भी यही मानना है कि अगर लोग अपने खाने पीने को पूरी तरह बैलेंस रखे तो लोगों की बहुत सारी परेशानियां इसी से हो सकती है क्योंकि खानपान का सीधा असर हमारे शरीर के अंगों पर पड़ता है तो अगर आप अपने जीवन को स्वस्थ एवं आनंदमय बनाना चाहते हैं तो ऊपर दी गई हुई बातों पर ध्यान दें और स्वस्थ रहें। अगर आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो तो मिशन आरोग्यम से जुड़ें। मिशन आरोग्यम से जुड़ने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल मिशन आरोग्यम को सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को दबाना न भूलें। (YOUTUBE)

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क्या हम सब को भी है कोरोना?

क्या आपको भी कोरोना है? अर्थव्यवस्था और चिकित्सा की कमर तोड़ चुके कोरोना वायरस ने जो कि एक वैश्विक महामारी है पूरी दुनिया को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है। हकीकत ये है कि आज किसी को भी नहीं पता कि हालात कब सुधरेंगे। आज तो हम तक है लेकिन हम कब तक इस बीमारी से बचे रहेंगे? कब तक इसकी दवा आएगी? कब तक वैक्सीन बनेगी? मान लेते हैं कि दवा बन भी गयी तो हमे कब तक मिलेगी ये भी किसी को नहीं पता क्योंकि ये तो हम सब जानते हैं न कि कल किसीने नहीं देखा है।  पिछले कुछ दिनों से हमे बस यही सुनने को मिल रहा है कि कोरोना के ये लक्षण है वो लक्षण हैं। अगर आपके साथ ऐसा है तो आप कोरोना के मरीज हैं अगर वैसा है तो आप कोरोना के मरीज हैं। कभी कहा गया कि ये मनुष्यों में नहीं फैलता फिर बोला गया नहीं ये एक आदमी से दूसरे आदमी में फैलता है। फिर कहा गया कि ये सिर्फ एक आदमी से दूसरे आदमी में फैलता है फिर बोला गया कि नहीं ये हवा में भी फैलता है। कभी कहा गया कि जिसे शर्दी खांसी के लक्षण हैं सिर्फ वो मास्क का प्रयोग करें लेकिन बाद में कहा गया कि मास्क का प्रयोग सबको करना है। कोरोना के विषय में अफवाह! पहले तो खूब प्रचार करके लोगों को ये बताया कि कोरोना के क्या-क्या लक्षण हैं बाद में बताया गया कि लगभग 80 प्रतिशत लोगों में कोरोना का कोई लक्षण होता ही नही है। कोई कयास लगा रहा है कि ये प्राकृतिक वायरस है तो कोई कहता है कि नहीं ये लैब में तैयार किया गया है। तो पते की बात ये है कि किसी को भी वास्तव में पता ही नही है कि सच्चाई क्या है। इन सबके बीच हमारी लोगों को लेकर सबसे बड़ी चिंता ये है कि सही और गलत का फैसला करते करते हमारे अपने लोग हमारा साथ न छोड़ दें। कहीं हमारे घर-परिवार और ये देश और पूरी दुनिया तबाह न हो जाए। दोस्तों मिशन आरोग्यम के तहत आयुर्वेद के माध्यम से हमने पूरे देश और दुनिया को स्वस्थ करने का जो महायज्ञ शुरू किया है उसमें मैं आपको ऐसे ऐसे मंत्र यानि उपाय देने वाला हूँ जिससे कोरोना से जंग में हमारी जीत सुनिश्चित है और दावे के कहा जा सकता है कि कोरोना हार जाएगा।  कोरोना से बचने का तरीका कोरोना से जीत की राह पर चलने के लिए के आपको सबसे पहले ये मानना होगा कि आप कोरोना के मरीज हैं। बहुत से लोग कहेंगे कि भला ये क्या बात हुई। न तो मैं घर से बाहर निकला, न मेरे अंदर कोरोना के कोई लक्षण हैं मैं तो बिल्कुल ठीक हूँ क्योंकि न तो मेरी कोई जांच हुई है और अगर हुई भी है तोरिपोर्ट नेगेटिव आई है फ़िर ये कैसे हो सकता है। मैं आपको एक बात बता दूँ कि आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार साफ-साफ कहा गया है कि 80 प्रतिशत कोरोना पोसिटिव मरीजों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं पाए जाते। उनके अन्दर कोई लक्षण नहीं था इसका मतलब ये है कि किसी को भी ये नहीं पता कि कौन कोरोना संक्रमित है और कौन नहीं। दूसरी बात ये की अभी तक कोरोना के जाँच की कोई भी विश्वशनीय तकनीक दुनिया में नहीं आई है।  टेस्ट किट की जांच में साफ-साफ बताया गया है कि इसकी विश्वसनीयता मात्र 3% से लेकर 80% है यानी यह बिल्कुक स्पष्ट नहीं है कि जांच में पॉजिटिव पाया जाने वाला पॉजिटिव है या नेगेटिव पाया जाने वाला नेगेटिव। तीसरी और सबसे मुख्य बात ये की देश के हर आदमी का जाँच करना नामुमकिन है क्योंकि अगर रोज एक लाख लोगों की जांच की जाए तब भी देश के आखिरी व्यक्ति के जाँच होने में 37 साल लग जाएँगे। ऐसा भी नहीं है कि एक बार टेस्ट नेगेटिव होने के बाद आप हमेशा के लिए सुरक्षित हो गए और आप कोरोना पॉज़िटिव नहीं हो सकते। ऐसा लगातार हो रहा है कि जांच में नेगेटिव आने के बाद भी लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। इन बातों का एक ही मतलब है कि टेस्ट पर निर्भर होना इस समस्या का समाधान नहीं है और ऐसी कोई दवा या टीका उपलब्ध नही है जो आपको सुरक्षा दे सके तो बस एक ही रास्ता है कि आप मान लें कि आप एक कोरोना पेशेंट हैं। चूंकि अब आप एक कोरोना पेशेंट हैं तो आपको तीन मुख्य काम तो करने ही हैं जैसे नियमित रुप से मास्क लगाना, सोशल डिस्टनसिंग का पालन करना और समय समय पर हाथ को साबुन से अच्छे तरह से धोना और ये उपाय आपको कुछ दिन नहीं बल्कि कुछ महीने करने होंगे।  कोरोना से बचने के घरेलू उपाय। क्योंकि अब आप एक एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण के कोरोना पेशेंट हैं तो आपको इसका प्रारंभिक उपचार भी शुरू कर देना चाहिए जैसे कि गर्म पानी का सेवन करें। पौस्टिक भोजन करें और खाने के बाद दूध या पानी मे हल्दी मिलाकर दिन में कमसे कम दो बार अवश्य पिएं। तुलसी के पत्ते, काली मिर्च, सोंठ, मुनक्का और अजवाइन से बनी हबर्ल टी या काढ़े का सेवन दिन में दो बार परिवार के सभी लोग करें। अगर इसे घर में बनाने में दिक्कत हो तो आरोग्यम हर्बल टी का उपयोग कर सकते हैं और आपको यही फायदा मिलेगा। यह हम आपको अन्यलोगों की तरह टाइमपास के लिए नहीं बता रहा हूँ कि इससे आपकी इम्युनिटी बढ़ेगी बल्कि इससे आपको शुरुआती दौर में ही वायरस को मारने की ताकत मिलेगी।  आपको ये समझना होगा कि अगर आपमें कोई लक्षण नहीं है तो इसका मतलब ये है कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अच्छी है या वायरस का संक्रमण आपके अंदर अभी शुरुआती दौर में है और अगर इसे अभी नहीं नष्ट करेंगें तो ये 7 से 10 या 15 दिन में आपके पूरे शरीर मे फैल जाएगा और इतना घातक नुकसान पहुंचाएगा की तब इसे नियंत्रित करना या समाप्त करना लगभग असंभव हो जाएगा। इसीलिए शुरुआती दौर में ही इसे घरेलू और आयुर्वेदिक उपायों का प्रयोग करके खत्म किया जा सकता है। हल्दी और सेंधा नमक मिलाकर उससे गरारे करें और हो सके तो दिन में दो बार भाप भी लें। इन उपायों से आप कोरोना से बचे रहेंगे और अगर आपकी इम्युनिटी अच्छी है तो शुरुआत में ही आप इसे खत्म कर सकते हैं।  कोरोना से सावधानी  अगर आपको कोई लक्षण आ रहे हैं जैसे खाँसी, बुखार, गले मे दर्द, फ़ेंफड़ों की कोई भी और समस्या हो तो जैसे सांस लेने में तकलीफ या कफ आदि समस्याऐं तो आपका कोरोना टेस्ट हुआ हो या न हुआ हो एलोपैथिक के चक्कर में न पड़ें। तुरंत किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर को से बीके आरोग्यम के हेल्थ केयर सेंटर में संपर्क करें। हम कुछ दवाओं के नाम बता रहे हैं जो आयुर्वेद की एंटीबायोटिक्स या दमदार एंटीवायरल है जैसे त्रिभुवन कीर्ति रस सुदर्शन घनवटी संजीवनी वटी गिलोय घनवटी विषम जोरानतक रस यह सब जबरदस्त एंटीवायरस इम्यूनिटी बूस्टर हैं। बीके आरोग्यं में इन औषधियों की और इनके योगों के माध्यम से हजारों टाइफाइड मलेरिया डेंगू चिकनगुनिया के वह रोगी जो सालों से एलोपैथी इलाज करा करा कर थक चुके थे आर्थिक और शारीरिक रूप से तबाह हो चुके थे उनको इन औषधियों से ठीक किया गया है आज जरूरत है औषधियों का भी निरंतर सेवन किया जाए। आरोग्यम रसायन के फायदे। आरोग्यम रसायन में इन औषधियों के साथ-साथ कई और ऐसे जड़ी बूटियों का प्रयोग किया गया है जो आपकी इम्यूनिटी को इस कदर बढ़ा देते हैं की नया संक्रमण शरीर में लगना तो दूर की बात पहले से मौजूद रोग और संक्रमण स्वयं नष्ट हो जाते हैं। आरोग्यम रसायन आयुर्वेद का वह चमत्कार है जिसके माध्यम से वर्षों से हम न सिर्फ ऐसे रोगियों को ठीक करते आ रहे हैं बल्कि स्वस्थ लोगों की इम्यूनिटी को इस कदर बढ़ा देते हैं कि किसी तरह का वायरस शरीर पर असर कर ही नहीं सकता। दोस्तों लॉक डाउन आज नहीं कल खुल जाएगा क्योंकि जीवन भर लॉक डाउन नहीं किया जा सकता लेकिन उसके बाद करोना किस तरीके से फैलेगा इसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते वही सरवाइव करेगा जिसकी इम्यूनिटी मजबूत होगी तो हमने शुरू में ही कहा कि आप पहले ही मान लीजिए कि आप करोना पेशंट हैं और एसिंप्टोमेटिक हैं तो प्राइमरी लाइन ट्रीटमेंट आपको तुरंत शुरू करना है और वह है जरूरी बचाव के साथ-साथ आरोग्यं रसायन का सेवन। विश्वास रखिय अगर आप इसे नियमित लेकर चलते हैं तो ही आप लॉक डाउन के बाद भी सरवाइव कर पाएंगे और हमारी आपके साथ साथ भारत सरकार से भी प्रार्थना है कि जब बड़े-बड़े साइंटिस्ट डॉक्टर और एलोपैथ की दुनिया में इसका कोई समाधान उपलब्ध नहीं है तो एक ही रास्ता है कि दुनिया की सबसे प्राचीन सबसे विश्वसनीय सबसे वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद का सहारा दिया जाए जो सिर्फ न सिर्फ बचाव में सक्षम है बल्कि शुरुआती स्टेज के वायरस को नष्ट करने में भी सक्षम है। दोस्तों जंगल की आग को भी एक गिलास पानी से बुझाया जा सकता है शर्त यह है कि पानी सही समय पर डाल दिया जाए। उसी तरह यह मानकर आप कोरोना पेशेंट हो अभी से शुरुआती उपचार और आरोग्यम रसायन शुरू कर दीजिये हमे विश्वास है कि सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया आयुर्वेद और आरोग्यम् से लाभान्वित होगी करोना से लड़ाई में आयुर्वेद ही दुनिया को जीत दिलाएगा। यह संदेश हर उस व्यक्ति तक पहुंचाइए जिसे आप सुरक्षित देखना चाहते हैं। कोरोना और बीमारियों से लड़ाई के इस मिशन आरोग्यम में आपका साथ बहुत जरूरी है। आप संकल्प लीजिये की हम स्वस्थ बनेंगे ताकि हमारा देश तरक़्क़ी कर सके।

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हम धोखे में हैं कि हम इलाज करवा रहे हैं!

अगर आपको किसी पर सबसे ज्यादा यकीन हो और वो ही आपको धोखा दे दे तो आपको कैसा महसूस होगा? आपके पैरों तले जमीन खिशक जाएगी! जरा सोचिए अगर आपको ये धोखा आपके ही डॉक्टर दे रहे हों तो। जी हाँ, बड़े- बड़े अस्पतालों में बैठे आपके ये डॉक्टर आपको धोखा दे रहे हैं। आज 90% प्रतिशत डॉक्टर मरीजों को इलाज के नाम पर उन्हें लूट रहे हैं और उन्हें धोखा दे रहे हैं। आज आपको छोटी से छोटी बीमारियों के नाम पर बड़े-बड़े रोगों की दवाइयां देकर आपको और गंभीर रोगों का मरीज बनाकर बहुत बुरी तरीके से लूटा जा रहा है।  इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस काम में देश के तमाम छोटे बड़े डॉक्टर शामिल हैं। क्या आपने कभी गौर किया है? आप किसी भी अस्पताल में चले जाइये अपनी रिपोर्ट लेकर और भले ही आपको कोई गंभीर समस्या हो और इसका इलाज उनके पास न हो तब भी आपको वो दवाईयों की एक लंबी सी पर्ची देंगे और कहेंगे कि इतने दिन तक दवा खाइये और फिर आइयेगा। यही प्रक्रिया आपके साथ दोबारा की जाती है और तब तक होता है जब तक आपकी तबियत बहुत ज्यादा न बिगड़ जाए या आप खुद दूसरी जगह न चले जाएं।  जी हाँ! इसी को धोखा कहते हैं। आप धोखे में हैं कि आप इलाज करवा रहे हैं और ये धोखा आपको कोई और नहीं बल्कि आपका डॉक्टर दे रहा है जिसपर आपने आँख मूंदकर भरोसा किया है। साथ ही साथ आपके पैसे भी लूट रहा है। आपको एक और बात पता होनी चाहिए कि ये कोई नई बात नहीं है। आप में से जितने लोग भी ये आर्टिकल पढ़ रहे हैं उनमें से भी कई लोगों ने यह महसूस किया होगा कि ये घटनाएं आपके साथ भी हो चुकी हैं।  रवि शंकर वर्मा जी की किडनी किसी कारण थोड़ी कमजोर हो गई थी जिस वजह से उनका खून साफ नहीं हो पा रहा था और खून गाढ़ा होता चला गया। धीरे-धीरे उनको सीने में तकलीफ़ हुई तो उन्होंने एक डॉक्टर को दिखाया और अपनी समस्या बताई। डॉक्टर साहब ने बीपी की तगड़ी तगड़ी दवा चला दी जिसकी समस्या रवि जी को थी ही नहीं और लगातार चलाते रहे। जबकि ईसीजी की जाँच में भी सब नॉर्मल था। जब उन्होंने दूसरी जगह दिखाया तब जाकर उनको असल समस्या का पता चला।  उनका इन डॉक्टरों से भरोसा उठ गया और उन्होंने आयुर्वेदिक इलाज कराने का फैसला लिया और हमारे बीके किडनी केयर में उनकी डैमेज हो चुकी किडनी को डॉक्टर्स ने न सिर्फ ठीक किया बल्कि उनका जड़ से इलाज करके पूरी तरह सही कर दिया।  फर्जी इलाज के नाम पर लूट से कैसे बचें? आप में से जितने लोग भी ऐसे किसी जगह इलाज करवा रहे हैं और महसूस कर रहे हैं कि यह चीजें आपके साथ भी हो रही हैं। आपको दवा दिया जा रहा है, पैसा लिया जा रहा है लेकिन अपका रोग ठीक नहीं हो रहा है, तो जान जाईए आपके साथ धोखा हो रहा है। आप धोखे में हैं कि आप इलाज करवा रहे हैं। सबसे अहम बात ये है दोस्तों की ये धोखा आपकी जान ले सकता है क्योंकि गलत इलाज आपके स्वास्थ्य को बहुत हानि पहुंचा सकता है।  गलत इलाज का नुकसान! देश में डॉक्टरों के द्वारा की गई गलती से यानी कि आइट्रोजेनिक कॉसेज से मरने वालों की संख्या स्वास्थ्य समस्या से हुई कुल मौतों की 20 से 25% प्रतिशत है। कुल मिलाकर बात ये है कि सबसे ज्यादे लोग किसी एक बीमारी के कारण नहीं बल्कि डॉक्टरों के गलतियों के कारण मरते हैं। लेकिन अब भी समय है की इस धोखे से बचा जा सके और अपनी जान बचाई जा सके क्योंकि आपकी जान की कीमत सिर्फ और सिर्फ आपके अपनों के लिए हैं। इन डॉक्टरों के लिए जो आपका गलत इलाज कर रहे हैं, आपको धोखा दे रहे हैं उनके लिए पैसे से बढ़कर कुछ नहीं है। आपको लगता है कि यह दवाइयां धीरे धीरे आपके रोग को मिटा देंगी और आपको स्वस्थ बना देंगी। लेकिन, मेरे दोस्तों आप धोखे में हैं। आपको लगता है कि आप जल्द ही ठीक होने वाले हैं लेकिन आप धोखे में हैं।  अंग्रेजी दवा या आयुर्वेदिक दवा?  आपको लगता है कि ये अंग्रेजी दवाइयाँ आपको निरोगी बना देंगी लेकिन आप बहुत बड़े धोखे में हैं क्योंकि ये अंग्रेजी दवाइयाँ आपको ठीक करें न करें लेकिन आपको बीमार जरूर बना देंगी। अगर आप वाकई में इस धोखे की दुनिया से निकलना चाहते हैं और डॉक्टरों की गलतियों से मरना नहीं चाहते हैं तो आपको सबसे सफल और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को अपनाना पड़ेगा। आयुर्वेद आपकी इम्युनिटी को बढ़ाता है और भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाता है। यहाँ तक कि आपको अगर कोई बीमारी है तो आयुर्वेद आपको जड़ से ठीक कर देगा। इलाज के बाद आयुर्वेद रिहैबिलिटेशन में भी मददगार है।  आज आपको कोई भी छोटी मोटी बीमारी होती है जैसे गले में खांसी या हल्का बुखार तो आप घरेलू नुस्खों को पूरे विश्वास के साथ आजमाते हैं जो कि एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, आयुर्वेदिक इलाज है। तो फिर आप अस्पतालों के चक्कर काटते हुए धोखा क्यों खा रहे हैं? जब आपकी बीमारी का विश्वसनीय एवं सम्पूर्ण इलाज आयुर्वेद में संभव है तो आप धोखा क्यों खा रहे हैं।  बीके आरोग्यम की खासियत। जी हाँ! हमारी संस्था बीके आरोग्यम आपकी हर बीमारी का इलाज आयुर्वेदिक रूप से करती है तो अब आपको किसी अंग्रेजी डॉक्टर से धोखा खाने की जरूरत नहीं है। हमने मिशन आरोग्यम की शुरुआत की है ताकि लोगों के साथ हो रहे इस धोखे को रोका जा सके और किसी भी व्यक्ति को फर्जी इलाज के नाम पर लूटा न जा सके। हमारे मिशन आरोग्यम से जुड़िये और स्वस्थ्य भारत के सपने को साकार करिये। अपने और अपने लोगों को धोखे का शिकार होने से बचाएं।

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70% बीमारियां कहाँ गायब हो गईं?

क्या आपने कभी गौर किया कि आज कल लोग अपना इलाज कहाँ करवा रहे हैं? आखिर लॉकडाउन में 70% बीमारियां कहां गायब हो गईं? कहीं कोरोना के डर से लोगों की बाकी बीमारियां खत्म तो नहीं हो गईं? जी नहीं ऐसा कुछ नही हैं इसके पीछे एक लंबी कहानी है जो 100% सच है और हम आपको आज इस सच से वाकिफ कराऐंगे। आज हम सब एक ज्वलंत विषय पर चर्चा करेंगे जिसका सीधा संबंध हमारे जीवन एवं मृत्यु से है। कभी आपने इस पर विचार किया कि इस कोरोना काल में बाकी बीमारियों में भारी कमी आई है। आज हमारे देश के तमाम हॉस्पिटल की ओपीडी बंद है,आईसीयू, सीसीयू में मरीजों की संख्या में भारी कमी आई है। एक न्यूज़पेपर की रिपोर्ट में बताया गया है कि अकेले भारतवर्ष में हर्ट अटैक के मामलों में 70% की गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान समय में किडनी फेल्योर जैसी समस्या में भी भारी कमी दर्ज की गई है। डायलिसिस सेंटर खाली पड़े हुए हैं एवं अन्य बीमारियों जैसे शुगर दमा इत्यादि के मरीजों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। अब आपके मन में ये बात आ रही होगी कि वाकई ये बात तो सच है आखिर ऐसा हो कैसे रहा है। कारण: दरअसल यह एक गंभीर चर्चा का विषय है आज यह जानना अति आवश्यक हो गया है कि इसका मुख्य कारण क्या है। अब हम आपको कारण के बारे में बताते हैं असल में जो दवाएं हम अपना इलाज समझ कर खाते हैं वही हमारी बीमारी का मुख्य कारण है। जी हाँ हमारी दवा ही हमारी अगली बीमारी का कारण है। हम एक उदाहरण से आपको समझाते हैं। एक दवा है जिसका नाम Reserpine है जो कि एंटी हाइपर इंटेंसिव ड्रग है। इसका मुख्य काम कैल्शियम चैनल को को ब्लॉक कर ब्लड प्रेशर को कम करना है। इस दवा का मुख्य काम तो एक है जो कि बीपी कम करना परंतु अगर हम इसके दुष्प्रभावों की बात करें तो हमें इसके साइड इफेक्ट्स की एक लंबी सूची मिलेगी। इस दवा के दुष्प्रभाव हैं अवसाद यानी डिप्रेशन, अतिसार यानी लूज मोशन, भार का बढ़ना यानी वेट गेन, अल्प रक्तदाब यानी बीपी का लो होना, पित्ताशय शोध यानी गाल ब्लैडर में सुजन, vomiting यानी उल्टी होना, जौंडिस यानी पीलिया, मांसपेशियों में पीड़ा यानी मसल्स पेन, रक्त में ग्लूकोज की मात्रा का सामान्य से अधिक हो जाना यानी डायबिटीज, पुरुषों में छाती का बढ़ जाना यानी गायनेकोमैस्टिया, नपुंसकता यानी इंपोटेंसी, बंद नाक यानी नेजल कंजेशन, स्टमक एसिडिटी यानी गैस एवं आंखों की पुतलियों का सिकुड़ना। इस एक उदाहरण से यह स्पष्ट हो जाता है कि दवा का प्रभाव तो एक है परंतु दुष्प्रभावों की एक लंबी सूची है। अब यहां आपने देखा कि कैसे बीपी की दवा खाने से एक पेशेंट को शुगर भी हो जाता है और अन्य समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे ही विभिन्न उदाहरण विभिन्न प्रकाशनों में एवं पाठ्यक्रमों में क्षपे पड़े हैं। विश्व में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिसमें जब भी स्वास्थ्य सेवाएँ किसी भी कारण से बाधित हुई हैं तो बीमारियों एवम बीमारों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।  रिसर्च के रिपोर्ट्स क्या कहते हैं? यूरोपियन मेडिकल कमीशन के 2014 के एक अध्ययन के अनुसार लगभग 2 से 5,00,000 मौतें प्रतिवर्ष यूरोप में होती है एवं 3.30 लाख से 6,00,000 मौतें अमेरिका में होती हैं जिसका मुख्य कारण एलोपैथिक दवाएं हैं। डॉ रेड्डी स्टैंड के अनुसार अमेरिका में मौत एवं बीमारियों की दूसरी सबसे बड़ी वजह डॉक्टर्स द्वारा लिखी गई दवाएं हैं। अभी तक हमने केवल समस्या की बात की अब हम समाधान की बात करेंगे। बीके आरोग्यम की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की पहल: हमारी संस्था बीके आरोग्यं ने अपने पेशेंट्स के लिए एक खास ऐप तैयार किया है जिसका नाम है आरोग्यम ऐप जिसमें आप अपनी एलोपैथिक दवा के स्थान पर कौन सी आयुर्वेदिक दवा जो कि सुरक्षित है उसका सेवन कर सकते हैं और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। साथ ही साथ एलोपैथिक दवाओं से होने वाले दुष्प्रभाव एवं गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं।  अब आपको विश्वास तो हो ही गया होगा कि हमारी इस बात में कितनी सच्चाई है। अब ज्यादा सोचने का समय नहीं। इससे पहले की दवाओं के नाम पर बिक रहीं बिमारियाँ आपके घर तक पहुंचे उससे पहले आप अपना इलाज स्वयं कर लें। इसका एकमात्र सबसे आसान उपाय है कि आप हमारे मिशन आरोग्यम से जुड़िये और अपने परिवार को स्वस्थ बनाएं।

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कफ़ की समस्या से कैसे बचें

 मनुष्य के शरीर में अगर किसी भी तरह की बीमारी का जन्म होता है तो कुछ समय पहले ही वह बीमारी लक्षण दिखाना शुरू कर देती है। जरूरी यह होता है कि हम समय रहते उन लक्षणों को पहचान ले और फिर उस बीमारी से बचने के तरीके को अपनाएं। कफ़ यानी कि बलगम की समस्या भी एक ऐसी समस्या है जो कि आजकल की जिंदगी में काफी आम हो गई। बुजुर्गों में तो यह लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है। लेकिन अभी भी इस समस्या को कोई सीरियस तरीके से नहीं ले रहा है।     इस बीमारी से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि यह ऐसी कई और बीमारियों को जन्म दे देती है जिसकी वजह से आदमी की जान जा सकती है। इसलिए आज हम इस लेख में आपको इस बीमारी के लक्षण और बचने के तरीकों से से वाकिफ करवाएंगे जिसकी मदद से आप खुद को इस बीमारी से बचा पाएंगे।     कफ के लक्षण-  बलगम यानी कफ के अनेक लक्षण होते हैं लेकिन कई बार लोग इसे सामान्य समझने की गलती कर देते हैं और लक्षणों को पहचान नहीं पाते हैं और फिर बाद में यह समस्या उनके लिए खतरनाक हो जाती है। इसलिए निम्नलिखित दिए गए लक्षणों को समय रहते पहचान कर आप कफ से बचाव के तरीकों को अपना सकते हैं-     1) जब शरीर में अत्यधिक मात्रा में बलगम बनने लगता है तो सबसे पहले व्यक्ति को सांस लेने मेंपरेशानी उत्पन्न होने लगती है क्योंकि शरीर में मौजूद बलगमहमारे नाक में मौजूद वायुमार्ग में रुकावट पैदा करने लगता है।     2) कफ के अत्यधिक बनने से कफ हमारे नाक एवं गले में जमा हो जाता है, जिसका हमें धीरे धीरे एहसास होने लगता है।    3) जो कफ हल्के पीले या हरे रंग का दिखाई पड़ता है या जो कफ असाधारण रूप से अधिक गाढ़ा होता है, वह बैक्टीरियल संक्रमण का एक महत्वपूर्ण लक्षण होता है।     4) अगर अचानक से कोई व्यक्ति बार-बार खांसने और थूकने की प्रक्रिया को दोहराने लगता है तो समझ लीजिए कि आपको कफ की समस्या हो चुकी है या फिर होने वाली है।     5) बलगम का एक और महत्वपूर्ण लक्षण क्या होता है की बात करते समय व्यक्ति के मुंह से बदबू आने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि व्यक्ति के गले में बलगम अत्यधिक मात्रा में जमा होता है जिससे कि जब वह मुंह खोलता है तो उसके गले के रास्ते होकर बदबू मुंह से बाहर आने लगती है।     किसी भी तरह की बीमारी के लक्षणों को पहचानना तो काफी आसान काम होता है लेकिन मुश्किल काम होता है कि हम उस बीमारी से बचने के लिए क्या करते हैं। नीचे हमने कुछ उपाय सुझाए हैंजिनकी सहायता से आप खुद को बलगम जैसी खतरनाक बीमारी से बचा सकता है।     कफ से कैसे बचें-   किसी भी तरह की बीमारी से बचने के तरीके अवश्य होते हैं लेकिन जरूरत होती है उन्हें जानने की उस पर अमल करने की। अगर आप नीचे दिए गए उपायों को अपनाएंगे तो निश्चित ही आप बलगम की समस्या से उबर पाएंगे।     1) पानी का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें- जब शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है तो शरीर में सूखा बलगम बनने लगता है जो कि परेशानी का विषय होता है इसलिए जितना ज्यादा हो सके उतना अत्यधिक पानी का सेवन करें।     2) सर के नीचे तकिया रखें- रात में सोते वक्त अक्सर लोगों के गले में बलगम की समस्या बढ़ जाती है जिसकी वजह से उनको लगातार खांसी का सामना करना पड़ता है और सोने में दिक्कत होती है। इस स्थिति में आपको अपना सिर बॉडी के मुकाबले थोड़ा ऊपर रखना है। ऐसा करने से गले और श्वास नली से बलगम नीचे की तरफ चला जाता है।    3) कैफीन का सेवन कम करें- कैफीन का सेवन करने से शरीर में बलगम अत्यधिक मात्रा में बनने लगता है इसलिए आवश्यक है कि कैफीन युक्त पदार्थों का सेवन कम से कम किया जाए जैसे कि चाय या कॉफी।     4) गरारा करें - अगर आपको बलगम की समस्या से बचना है तो नियमित तौर पर आपको नमक के पानी के साथ गरारे करने होंगे क्योंकि ऐसा करने से आपका गला साफ रहेगा और आपको कफ की समस्या नहीं होगी।    5) गर्म तरल पदार्थ पीएं, क्योंकि ये वायुमार्गों को नम करते हैं, जिससे जमे हुऐ बलगम को निकालने में मदद मिलती है।    6) उत्तेजक पदार्थों के संपर्क में आने से बचने की कोशिश करें, जैसे घरेलू क्लीनर, पेंट का धुआं, केमिकल या सिगरेट का धुआं आदि। धूम्रपान करना बंद कर दें, क्योंकि यह गले को उत्तेजित करता है और श्वसन संबंधी समस्याओं को जन्म देता है।    तो यदि आप अगर ऊपर दिए गए बचावों को अपने जीवन में धारण करते हैं तो निश्चित तौर पर आप बलगम की समस्या से खुद को बचा पाएंगेऔर यदि यह बचावभी आपको बलगम की समस्या से निजात पाने में सहायता नहीं कर पा रहे हैं तो हमारा सुझाव यही है कि आप अपनी डॉक्टर से सलाह लें।     अंग्रेजी दवाइयों का सेवन बिना किसी सलाह के न करें और हम तो यही कहेंगे कि आयुर्वेद को अपनाएं क्योंकि इस समस्या से बचने के लिए आयुर्वेद में रामबाण इलाज मौजूद है। कफ की समस्या से बचने के लिए और इससे जुड़ी आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में जानने के लिए आप हमारा अगला लेख पढ़ सकते हैं।    हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में हमें ऐसे बहुत से लोग मिलते हैं जो लगातार खांसते रहते हैं यानी कि ऐसे लोग जिनका गला साफ नहीं रहता। इस समस्या को आम भाषा में कफ यानी कि बलगम के नाम से जाना जाता है। बुजुर्ग लोगों में यह समस्या काफी ज्यादा पाई जाती है, लेकिन आजकल यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में ले रही है। वैसे तो व्यक्ति के शरीर में प्रतिदिन थोड़ी-बहुत कफ का उत्पादन होता है लेकिन जब यह संख्या बढ़ जाती है तब यह जानलेवा बीमारी का रूप ले लेती है।    ज्यादा बलगम बनने की वजह से व्यक्ति के शरीर में स्वास से संबंधित काफी सारी जानलेवा और खतरनाक बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि हम इस बात की जानकारी प्राप्त कर लें कि आखिर बलगम की समस्या दरअसल होती क्या है और इसके के जन्म लेने की सही वजह क्या है।     कफ की समस्या क्या होती है?   कफ एक चिपचिपा और गाढ़ा लिक्विड पदार्थ होता है जो कि हमारे शरीर में मौजूद टिशु की वजह से बनता है। सामान्य भाषा में अगर कहा जाए तो कफ को रेस्पिरेटरी सिस्टम यानी हमारी श्वास प्रणाली बनाती है। कफ को बॉडी के बहुत सारे फंक्शन के लिए अत्यंत जरूरी माना जाता है। कफ हमारे गले में एक जाल की तरह काम करता है जो कि बाहर से हमारे शरीर में जाने वाली प्रदूषित चीजों को शरीर के अंदर यानी गले से नीचे पहुंचने में रोकता है।    कफ में बाहरी बैक्टीरिया से लड़ने के लिए कुछ खास एंजाइम होते हैं, जोकि बाहर से शरीर में जाने वाले बैक्टीरिया से लड़ कर उन्हें नष्ट करते हैं। आम तौर पर बलगम हमारे लिए कोई चिंता का विषय नहीं है, लेकिन शरीर में जब कफ अत्यधिक मात्रा में बनने लगे तो यह सिर्फ चिंता का विषय ही नहीं बल्कि हमारी जान का दुश्मन बन जाता है। कभी-कभी जब कब अत्यधिक मात्रा में बनने लगता है तो यह हमारे लिए सांस लेने में भी परेशानियां उत्पन्न करता है।     अगर हमारे शरीर में कफ का उत्पादन अत्यधिक मात्रा में हो रहा है तो फिर इसके बहुत से कारण हो सकते हैं। आइए हम आपको कुछ चुनिंदा एवं महत्वपूर्ण कारणों से वाकिफ करवाते हैं। वातावरण में बदलाव व्यक्ति के शरीर में अत्यधिक मात्रा में कफ के उत्पादन का सबसे मुख्य कारण होता है। मौसम में बदलाव के कारण व्यक्ति के शरीर में एलर्जी हो जाती है और यही एलर्जी ज्यादा बलगम बनाने के लिए जिम्मेदार होती है। मौसम में बदलाव के समय पौधे पोलेन छोड़ते हैं, जो खांसी और कफ के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन पोलेन्स को बाहर निकालने के लिए बॉडी अधिक मात्रा में कफ बनाती है।    सर्दियों के मौसम में गले में बलगम की समस्या काफी आम हो जाती है ऐसा इसलिए क्योंकि सर्दियों के मौसम में वायरल इंफेक्शन जैसे फ्लू, साइनस इंफेक्शन और सामान्य सर्दी जुकाम होता है और ये सारे वायरल इंफेक्शन कफ को जन्म देने में सहायक होते हैं।     अधिक मसालेदार भोजन के सेवन से भी व्यक्ति को कफ की समस्या उत्पन्न हो सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं में अधिकतर यह बीमारी देखने को मिल जाती है। परफ्यूम्स, क्लीनिंग प्रोडक्ट्स या पर्यावरण में फैला धुआं, जिसमें जलन पैदा करने वाले कैमिकल्स होते हैं ये सभी भी कफ जैसी गंभीर बीमारी को जन्म देने में काफी सहायता प्रदान करते हैं।     बलगम अगर व्यक्ति के शरीर में 8 या 10 दिन से ज्यादा तक ठहर जाता है तो समझ लीजिए कि यह आपके लिए परेशानी का विषय बन चुका है और इस स्थिति में आपको सतर्कता के साथ काम करना चाहिए । तो यदि आपको भी गले में बलगम की समस्या हो रही है तो इसे बिल्कुल भी हल्के में मत लीजिए क्योंकि यह छोटी समस्या आने वाले समय में आपके लिए कई बड़ी परेशानियां खड़ी कर सकती है।       अगर आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो और आप चाहते हैं कि पूरा भारत आरोग्य बने तो मिशन आरोग्यम से जुड़ें। मिशन आरोग्यम से जुड़ने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल मिशन आरोग्यम को सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को दबाना न भूलें। 

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टाइफाइड क्यों होता है?

 विश्व के लगभग सारे विकसित देश चाहे वह अमेरिका हो या रूस हो या फिर चीन हो सभी ने टाइफाइड से इतनी दूरी बना ली है कि अब इन देशों में बहुत ही कम टाइफाइड के केस देखने को मिलते हैं। लेकिन भारत अभी भी टाइफाइड की समस्या से लगातार जूझता चला आरहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत के लोग इस बीमारी के बारे में जानते तो हैं, लेकिन इस बीमारी के लक्षणों को पहचानने में देर कर देते हैं और फिर उसी वजह से बीमारी से जुड़े प्रीकॉशन अपनाने में भी देरी हो जाती है जिसके कारण यह संक्रमण बहुत तेजी से फैल जाता है। इसलिए जरूरी है कि हम इस बीमारी के लक्षणों के बारे में पूरी तरह जानकारी प्राप्त कर लें और फिर इस बीमारी से किस प्रकार बचना है यह भी सुनिश्चित करें।     टाइफाइड के लक्षण- टाइफाइड एक ऐसी समस्या है कि अगर इसके लक्षणों को समय रहते पहचान लिया गया तो 3 से 4 दिन के अंदर इस बीमारी से खुद को दूर किया जा सकता है। इसके लिए नीचे दिए गए लक्षणों को गंभीरता से पढ़ें और उन्हें अपने जहन में बिठा लें।     1) तेज बुखार- टाइफाइड का सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य लक्षण होता है कि इस बीमारी के शुरू होने से कुछ दिन पहले ही आपको काफी तेज बुखार की अनुभूति होने लगती है। व्यक्ति को ऐसा महसूस होगा कि उसका शरीर जल रहा है। तो यदि आपको भी ऐसे लक्षण देखने को मिलते हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर जांच करवाइए आपको टाइफाइड की समस्या हो सकती है।     2) सर दर्द- तेज बुखार के अलावा सर दर्द भी टाइफाइड का एक महत्वपूर्ण लक्षण माना जाता है कई बार ऐसा होता है कि तेज बुखार के साथ-साथ सर दर्द की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है और टाइफाइड को जन्म देती है।     3) बिगड़ी हुआ भूख- बिगड़ी हुई भूख से हमारा तात्पर्य है कि कभी-कभी व्यक्ति को ज्यादा भूख लगती है तो कभी-कभी कम। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो तुरंत जाकर जांच करवाई क्योंकि यह टाइफाइड का एक लक्षण हो सकता है।     4) पेट दर्द- टाइफाइड को पैदा करने वाला बैक्टीरियाजैसे ही पेट में प्रवेश करता है तो व्यक्ति के पेट में दर्द शुरू हो जाता है इसलिए अगर आपके पेट में लंबे समय तक दर्द बना रहे तो आपको जाकर जांच करवानी चाहिए। ऐसी परिस्थिति में बिना किसी सुझाव के खुद ही दवा का सेवन करने से बचें।     5) बेचैनी- टाइफाइड के शुरू होने से पहले व्यक्ति को काफी बेचैनी होती है। उसे हर बात की टेंशन में लगती है और उसका किसी काम में मन नहीं लगता। टाइफाइड के लक्षणों को जानने के बाद उससे बचने के तरीकों को जानना भी अत्यंत आवश्यक है क्युको बिना बचाव के बारे में जानकारी किए बिना हम खुद को किसी भी बीमारी से नहीं बचा पाएंगे।     टाइफाइड से कैसे बचें- 1) साफ और उबला हुआ पानी पिएं- टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि साफ पानी पिएं और अगर आपको लगता है कि आपके घर में पानी पूरी तरह से साफ नहीं है तो उसे उबाल लें और फिर उसका सेवन करें।     2) पका हुआ और गर्म खाने खाएं- खाने के जरिये बहुत सी बीमारी हमारे शरीर में प्रवेश कर जाती हैं इसलिए आवश्यक है कि खाने को हमेशा पूरी तरह पका लें और फिर उसका सेवन करें।     3) नॉनवेज न खाएं- मांस मछली के जरिये टाइफाइड को जन्म देने वाला वायरस बहुत तेजी से फैलता है। इसलिए जितना ज्यादा हो सके नॉनवेज स्व दूरी बनाएं और शुद्ध और शाकाहारी खाना खाएं।    4) बाहर से आये सामानों को साफ करके खाएं- बाहर से आये हुए फल और सब्जियों को खाने से पहले उसको अच्छी तरह से धो लें। हो सके तो पैकेट में बंद सामान का इस्तेमाल ज्यादा करें।     5) साफ सफाई का ध्यान रखें- अगर आपका वातावरण साफ रहेगा तो आपको टाइफाइड ही नहीं बल्कि और भी बहुत सारी बीमारियां अपनी गिरफ्त में नहीं ले पाएंगी। इसलिए जितना हो सके अपने आस पास साफ सफाई रखें और गंदगी से दूरी बनाएं।     अगर आप उपयुक्त दिए गए बचाओं को अपने जीवन में धारण करते हैं तो जरूर ही आप खुद को टाइफाइड से दूर रख पाएंगे। और अगर आप में से कोई टाइफाइड से पीड़ित है तो हम आपके लिए अपने अगले पार्ट में टाइफाइड से बचने के लिए उन आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में बताएंगे जिसके इस्तेमाल के बाद आप पुरो तरह टाइफाइड से मुक्त हो जाएंगे।    दुनिया की सबसे आम बीमारियों में शामिल टाइफाइड से हर साल लगभग दो करोड़ लोग पीड़ित होते हैं। इसी टाइफाइड की वजह से हर साल करीबन 2 लाख लोगों को जान गंवानी पड़ती है। हालांकि ये संख्या इतनी बड़ी नहीं है लेकिन इतनी तो जरूर है की आप इस बीमारी को थोड़ा सीरियस लें क्योंकि टाइफाइड से मरने वाले हर साल 2 लाख लोग वही होते हैं जो इस बीमारी को मजाक में ले लेते हैं।    टाइफाइड से बचने का एकमात्र तरीका यही है कि हम इस बीमारी को पहचान लें, इसे पूरी तरह समझ ले कि आखिर यह क्यों होती है किस तरह से होती है। इसलिए आज हम आपके लिए यह लेख तैयार करके लाए हैं इसमें आपको टाइफाइड के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी।    टाइफाइड क्या है?   टाइफाइड एक गंभीर इंफेक्शन है जोकि साल्मोनेला एन्टेरिका सेरोटाइप टाइफी बैक्टीरिया से होता है। यह साल्मोनेला पैराटाइफी बैक्टीरियम से भी फैलता है। यह बैक्टीरिया मुंह के रास्ते हमारे शरीर में प्रवेश करता है जैसे कि पानी और खाने के जरिए हमारे शरीर के अन्दर जाता है और हमारे लिए परेशानी खड़ी करता है।     टाइफाइड के दौरान अक्सर व्यक्ति को तेज बुखार और सर दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है जो कि कई दिनों तक बनी रहती है। टाइफाइड से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि यह किसी भी उम्र के और किसी भी वर्ग के व्यक्ति को हो सकता है। टाइफाइड के दौरान अगर बुखार ज्यादा लंबे समय तक टिक गया है तो समझ लीजिए आपके लिए बहुत बड़ी परेशानी का सबब बन चुका है। व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और टाइफाइड अंदर से धीरे-धीरे उसके शरीर को खोखला कर देता है।     टाइफाइड होता क्या है, यह जानना ज्यादा जरूरी नहीं है, लेकिन हमारे लिए यह जानना बहुत ही आवश्यक है कि आखिर टाइफाइड की समस्या होती क्यों है? किस वजह से यह समस्या हमारे शरीर में जन्म लेती है या फिर हमारे शरीर में प्रवेश करती है।     टाइफाइड क्यों होता है?    टाइफाइड जिस बैक्टीरिया के कारण उत्पन्न होता है, वह हमारे शरीर में कुछ ही वजह से प्रवेश करता है। अगर हम उन वजहों पर ध्यान देंगे तो अवश्य ही टाइफाइड जैसी खतरनाक बीमारी से भी खुद को बचा सकेंगे।     1) गन्दे पानी का सेवन - कभी भी गंदे पानी का सेवन ना करें क्योंकि गंदे पानी का सेवन टाइफाइड फैलने का सबसे मुख्य कारण होता है। अगर आप के वातावरण में भी कहीं पर गंदा पानी है तो कृपया उससे दूरी बनाए नहीं तो आपको टाइफाइड की समस्या होना निश्चित है।     2) दूषित भोजन न करें- गंदे पानी की तरह ही दूषित भोजन से भी पर्याप्त दूरी बनाए। भोजन को हमेशा ढक कर रखें और उसे खाने के बाद फिर से ढके। कभी भी खुले में रखा हुआ भोजन ना खाएं। बाहर से लाई हुई चीजों को हमेशा धोने के बाद ही खाएं क्योंकि उस पर वायरस हो सकता है।     3) आसपास की गंदगी -कई बार घर के आस-पास गंदी चीजें होने से भी यह संक्रमण फैलता है। जैसे कि घर के पास गन्दा कचरा और गंदे पानी के एकत्रित होने से टाइफाइड होने का खतरा बढ़ जाता है।    4) अगर आपकी जान पहचान में किसी को भी टाइफाइड की समस्या है तो जितना हो सके उससे दूरी बनाए क्योंकि अगर आप उसके संपर्क में आएंगे तो भी आपको टाइफाइड की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।     उपयुक्त कारणों से ही टाइफाइड की समस्या तेजी से लोगों के बीच खेलती है अगर आप उपयुक्त कारणों को समझ कर उससे बचने के तरीकों को अपनाकर जीवन में आगे बढ़ेंगे तो आपको टाइफाइड जैसे- गंभीर बीमारी का सामना नहीं करना पड़ेगा।     अगर आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो और आप चाहते हैं कि पूरा भारत आरोग्य बने तो मिशन आरोग्यम से जुड़ें। मिशन आरोग्यम से जुड़ने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल मिशन आरोग्यम को सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को दबाना न भूलें। (youtube )      

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हेपेटाइटिस-बी क्यों होता है?

 लीवर हमारे शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। लीवर उन अंगों में शामिल है जिसकी वजह से हम जीने में सक्षम है। इसलिए जब कभी लीवर पर कोई गलत प्रभाव पड़ता है तो उसका सीधा असर हमारे शरीर के बाकी अंगों पर पड़ता है। लीवर कुछ ही कारणों से क्षतिग्रस्त हो सकता है और इसमें सबसे मुख्य कारण है हेपेटाइटिस बी। हेपेटाइटिस बी के मरीज बहुत ही तेजी से बढ़ते जा रहें है। यह बीमारी एड्स जैसी जानलेवा बीमारी से भी ज्यादा खतरनाक है।     लीवर से संबंधित 60% बीमारियां हेपेटाइटिस बी की वजह से ही होती है। दुनिया की एक तिहाई जनसंख्या हेपेटाइटिस बी से संक्रमित है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जितने लोग एड्स की वजह से सालभर में मरते हैं, उससे ज्यादा लोग हेपेटाइटिस बी की वजह से 1 दिन में जान गंवा देते हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम इस खतरनाक संक्रमण के बारे में पूरी जानकारी हासिल करें।     हेपेटाइटिस बी क्या है?     हेपेटाइटिस बी लीवर से सम्बंधित रोग है। यह संक्रमण HBV नामक वायरस के कारण फैलता है। हेपेटाइटिस बी से ग्रषित मरीजों के लीवर में सूजन उतपन्न होने के साथ साथ जलन पैदा हो जाती है जिसकी वजह से मरीज को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभीऐसा होता है कि हेपेटाइटिस बी का मर्ज ज्यादा दिन तक मनुष्य के शरीर में नहीं रहता है जिससे कि मनुष्य को ज्यादा तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ता। परंतु जब यह मर्ज ज्यादा दिन तक शरीर में उपस्थित रह जाता है तब यह लीवर कैंसर जैसी खतरनाक जानलेवा बीमारी को जन्म दे देता है।     लंबे समय तक अगर यह मर्ज शरीर में रह जाता है तो इसे क्रोनिक हेपेटाइटिस बी के नाम से जाना जाता है। क्रोनिक का मतलब होता है एक खतरनाक संक्रमण। क्रोनिक हेपेटाइटिस बी का इलाज अगर समय रहते ना किया गया तो यह अवश्य ही आपकी जान ले लेगा। लीवर का क्षतिग्रस्त होना, लीवर का खराब होना और लिवर कैंसर जैसी समस्याएं हेपेटाइटिस बी केकुछ दुष्परिणाम है।     हेपेटाइटिस बी को एड्स से भी ज्यादा गंभीर बीमारी माना जाता है। जब किसी व्यक्ति को हेपिटाइटिस बी की समस्या हो जाती हैऔरकाफीसालतकठीकनहीहोता तो उसकी जान बच पाना काफी मुश्किल होती है। हेपेटाइटिस बी की वजह से खराब हुए लीवर को कई बार लोग ट्रांसप्लांट के जरिए रिप्लेस करवा देते हैं, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं रहता कि हेपेटाइटिस बी का जो संक्रमण है वह खून की वजह से फैलता है। इसलिए कभी-कभी जो नया लीवर लगता है उसमें भी हेपेटाइटिस बी की वजह से समस्याएं उत्पन्न होने की संभावनाएं रहती हैं।     हेपेटाइटिस क्यों होता है?     हेपेटाइटिस बी जैसे खतरनाक संक्रमण के फैलने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं। इनमें कुछ सबसे मुख्य कारण है-    हेपेटाइटिस बी नामक वायरस आमतौर पर मरीज के खून में होता है तो यदि कोई अस्वस्थ व्यक्ति मरीज के द्वारा इस्तेमाल की गई सुई का इस्तेमाल अपने ऊपर करता है तो उसको हेपेटाइटिस बी होने के चांस काफी बढ़ जाते हैं और यदि ऐसी कोई सुई का इस्तेमाल गर्भवती मां पर किया जाता है तो गर्भवती मां के साथ-साथ उसकी गर्भ में पल रहे बच्चे को भी हेपेटाइटिस बी का संक्रमण हो सकता है। कई बार ऐसा होता है कि कोई गर्भवती महिला हेपेटाइटिस बी की समस्या से गुजर रही होती है, तो ऐसे में उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को भी हेपेटाइटिस बी होने की संभावनाएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं।     अगर हम हेपेटाइटिस बी से संक्रमित व्यक्ति के ब्लड का इस्तेमाल भी करते हैं तो भी हमें हेपेटाइटिस बी होने की संभावनाएं काफी हद तक बढ़ जाती है। शायद अब आपको अंदाजा हो गया होगा कि हेपेटाइटिस बी की समस्या कितनी खतरनाक है। अगर यह बीमारी एक बार जोर पकड़ ले तो इससे बच पाना हमारे लिए नामुमकिन साबित हो सकता है इसलिए जरूरी है कि हम समय रहते सही कदम उठाएं और खुद को ऐसी जानलेवा बीमारी से बचाएं।  लीवर के खराब होने का सबसे बड़ा कारण है हेपेटाइटिस बी। इस बात को जानने के बावजूद लोग इससे बचने के प्रयासों में असफल हैं। जब तक इस बीमारी की वजह से किसी व्यक्ति की जान नहीं चली जाती तब तक उसके साथ रहने वाले लोगों को इस बात का एहसास नहीं होता कि हेपेटाइटिस बी की समस्या कितनी खतरनाक है। अगर आपको अपनी और अपने परिवार की जान की थोड़ी बहुत भी फिक्र है तो इसआर्टिकलको पूरा पढ़े क्योंकि इस लेख में हम आपको बताएंगे कि हेपेटाइटिस बी की समस्या के लक्षण क्या है और उससे किस तरह से हम खुद को बचा सकते हैं।       हेपेटाइटिस बी के लक्षण-  असल में हेपेटाइटिस बी उन चुनिंदा बीमारियों में शामिल है जिसके लक्षण काफी ज्यादा समय तक नजर नहीं आते हैं, जिसके कारण मरीज को पता ही नहीं चल पाता कि वह हेपेटाइटिस बी के संक्रमण का शिकार हो चुका है। लेकिन जब एक बार इसके लक्षण नजर आने लगते हैं तो उन्हें पहचानना काफी आसान होता है।     1) शरीर का पीलापन- हेपेटाइटिस बी का सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण लक्षण यह है कि इस वायरस से संक्रमित होने के बाद इंसान का शरीर पीला होने लगता है यानी कि उसे पीलिया हो जाता है। पीलिया के दौरान इंसान की आंखें पीली हो जाती है जिससे की काफी आसानी से हेपेटाइटिस बी की पहचान की जा सकती है।     2) यूरीन का पीलापन- हेपेटाइटिस बी के दौरान शरीर से निकलने वाला दूषित पानी यानी कि यूरिन भी पीली होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हेपेटाइटिस बी के दौरान लीवर सही तरह से काम नहीं कर पाता है।     3) खुजली - लीवर से संबंधित उत्पन्न होने वाली समस्याओं का सबसे बड़ा लक्षण होता है खुजली। हेपेटाइटिस बी के दौरान भी इंसान केशरीर में जगह जगह खुजली होने लगती है। तो अगर आपको रह रहकर खुजलाहट हो रही है तो समझ जाइए कि आपके लीवर पर किसी चीज का गलत असर पड़ रहा है।     4) हल्का बुखार और बदन दर्द- अगर किसी व्यक्ति को दिनभर हल्का हल्का बुखार रहता है और साथ में उसके बदन में दर्द भी रहता है तो हो सकता है उसके खून में हेपेटाइटिस बी का संक्रमण फैल गया हो। अगर ऐसा हो तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाकर इसकी जांच करवानी चाहिए।    5) भूख कम लगना- भूख कम लगना भी हेपेटाइटिस बी का एक लक्षण माना जाता है। आमतौर पर हेपेटाइटिस बी के दौरान जब इंसान का लीवर सही तरह से काम नहीं करता है तो इंसान को भूख भी कम लगने लगती है।     आजकल के व्यक्तियों के लिए किसी बीमारी के लक्षण को पहचानना तो काफी आसान काम है, लेकिन उस बीमारी से बचने के लिए जिन उपायों को उसे अपने जीवन में धारण करना होता है , वह व्यक्ति उसे नहीं कर पाता क्योंकि वह काम उसे काफी मुश्किल लगता है। लेकिन हेपिटाइटिस बी एक ऐसी समस्या है जिसके उपायों को अगर आप नहीं अपनाएंगे तो आपकी जान भी जा सकती है।    हेपेटाइटिस बी से कैसे बचें-    1) सफाई पर ध्यान दें- हेपेटाइटिस बी से बचने के लिए साफ और सुथरी जगह पर रहना काफी लाभकारी हो सकता है। अगर व्यक्ति का वातावरण साफ है तो उसे हेपेटाइटिस बी की समस्या कभी नहीं होगी।    2) सुरक्षित यौन संबंध- हेपेटाइटिस बी से बचने के लिए सुरक्षित यौन संबंध बनाए क्योंकि यौन संबंध के दौरान हेपेटाइटिस बी की तरह और भी बहुत सारी बीमारियों का आदान प्रदान हो सकता है, इसलिए यौन संबंध बनाते समय सुरक्षा का अत्यधिक ध्यान दें।    3) दस्तानों का प्रयोग- अगर कोई व्यक्ति ब्लड बैंक में काम करता है या किसी हॉस्पिटल में काम करता है तो उसे आमतौर पर रक्त छूना पड़ता है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को हेपेटाइटिस बी है तो उसके रक्त को छूने से पको भी समस्या हो सकती इसलिए हमेशा दस्तानों का प्रयोग करें।     4) इस्तेमाल की हुई सुई को पुनः इस्तेमाल न करें- कई बार ऐसा होता है कि आप किसी हॉस्पिटल में इंजेक्शन लगवाने जाते हैं तो फिर आपको किसी और व्यक्ति पर इस्तेमाल किया हुआ इंजेक्शन भी लगा दिया जाता है। ऐसे में हेपेटाइटिस बी के संक्रमण होने के संभावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, इसलिए पहले ही इस बात की जांच कर ले कि आपको लगाए जाने वाला इंजेक्शन किसी और का इस्तेमाल हुआ है या फिर नहीं।     5) हेपेटाइटिस बी का संक्रमण बहुत ही तेजी से फैलता है इसीलिए किसी भी दूसरे व्यक्ति के द्वारा यूज़ किया गया टूथब्रश या फिर रेजर इस्तेमाल करने से खुद को बचाएं।     तो अगर आप उपयुक्त दिए गए उपायों को अपनाते हैं तो निश्चित ही आप खुद को हेपेटाइटिस बी जैसी जानलेवा बीमारी से दूर रख पाएंगे। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह संक्रमण बहुत ही तेजी से लोगों में फैलता है, इसलिए अगर आप के आस पास कोई ऐसा व्यक्ति है जो हेपेटाइटिस बी से ग्रसित है तो जितना संभव हो सके उससे और उसके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों से खुद को दूर रखें।     अगर आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो और आप चाहते हैं कि पूरा भारत आरोग्य बने तो मिशन आरोग्यम से जुड़ें। मिशन आरोग्यम से जुड़ने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल मिशन आरोग्यम को सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को दबाना न भूलें।  (youtube )

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डायरिया क्या है?

 मौसम में बदलाव और व्यस्त जीवनशैली के कारण इंसान के शरीर में बहुत सी बीमारियों का जन्म हो जाता है। इन छोटी छोटी बीमारियों को कई बार हम सभी हल्के में ले लेते हैं परंतु बाद में यही बीमारी हमारे शरीर में किसी बड़ी बीमारी का कारण बन जाती है जोकि बाद में हमारे लिए जानलेवा साबित होती हैं। डायरिया भी उन्हीं आम बीमारियों में शामिल है जिसको की लोग हल्के में लेने की भूल कर देते हैं। डायरिया को ही आम शब्दों में दस्त कहा जाता है।     डायरिया की समस्या वैसे तो हर उम्र के व्यक्तियों को हो सकती है, लेकिन भारत में यह समस्या कम उम्र के बच्चों में ज्यादा पाई जाती है। कुपोषित लोगों, शिशुओं, छोटे बच्चों, में इस तरह के खतरनाक संक्रमण का शिकार होने का खतरा अधिक होता है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया मौत का दूसरा प्रमुख कारण है। तो आइए इस खतरनाक बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी लेते हैं।     डायरिया क्या है?   डायरिया पाचन तंत्र से सम्बंधित बीमारी है। डायरिया को दस्त के रूप में भी जाना जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से इंसान के शरीर से सामान्य की तुलना में अधिक शिथिल या अधिक मल का निष्काशन होता है।डायरिया मुख्यतः गैस्ट्रोएंटेराइटिस की वजह से होता है। गैस्ट्रोएंटेराइटिस को पेट का फ्लू भी कहा जाता है। आमतौर पर किसी भी इंसान को दस्त की समस्या 2 से 3 दिन तक रहती है परंतु डायरिया के दौरान यह समस्या काफी लंबे समय तक शरीर की परेशानी का कारण बनी रहती है।     डायरिया की समस्या शरीर में पानी और नमक की कमी की वजह से होता है। इस रोग के दौरान मनुष्य की शरीर से निष्काषित होने वाला मल पानी की तरह पतला हो जाता है। दस्त की समस्या के दौरान कई बार तो इंसान को मल त्याग के समय दर्द का भी अनुभव होता है।     डायरिया को हम इतनी गंभीर बीमारी इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इसकी वजह से शरीर का सारा तरल पदार्थ मल के रूप में बाहर निकल जाता है जिससे कि हमारा शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकता है। डिहाइड्रेशन यानी कि पानी की कमी और मानव शरीर की सबसे बड़ी जरूरत ही पानी है। तो आप खुद ही समझ सकते हैं कि डायरिया की वजह से हमारे शरीर में क्या क्या नुकसान हो सकते हैं।     डायरिया क्यों होता है?   डायरिया की समस्या कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है। निम्नलिखित कुछ मुख्य वजह हैं जिनकी वजह से इंसानी जिस्म से दस्त जैसी गंभीर रोग की शुरुआत होती है-    1) दूषित पानी हमारे शरीर के लिए सबसे बड़ा संकट है और न जाने कितनी बीमारियों को अपने साथ लेकर आता है। डायरिया की समस्या भी दूषित पानी पीने से शुरू होती है।     2) कुछ व्यक्तियों का पाचन तंत्र भी कमजोर होता है और फिर जब कभी वो व्यक्ति कोई ऐसी चीज का सेवन कर लेता है जिसको पचाना उसके शरीर के लिए मुश्किल होता है तो ऐसे में दस्त की शरुआत होना लाज़मी है।    3) आज कल मार्किट में बहुत से अंग्रेजी दवाइयां मौजूद हैं। सभी को इन अंग्रेजी दवाओं के साइड इफेक्ट के बारे में पता है। डायरिया भी कई बार अंग्रेजी दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में शरीर में जन्म लेकर हमारे संकट का कारण बन जाता है।     4) डायरिया का एक और मुख्य कारण वायरल इंफेक्शन भी होता है। मौसम में बदलाव और बाहर का गलत खाना वायरल इंफेक्शन का मुख्य कारण होता है। बाद में इसी की वजह से दस्त की समस्या शुरू हो जाती है।     5) कई बार ऐसा होता है कि हम किसी ऐसी चीज का सेवन कर लेते हैं जिससे कि हमें एलर्जी होती है। ऐसी चीज के सेवन से हमारे पेट में इंफेक्शन हो जाता है और दस्त की समस्या शुरु हो जाती है।    आजकल दस्त की समस्या बहुत ही आम है। सभी को लगता है कि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है। परंतु जब यह बीमारी जोर पकड़ लेती है तो कई बार इंसान अत्यधिक प्रेसर के कारण बाथरूम तक भी नहीं पहुंच पाता। इसलिए आवश्यक है कि इस बीमारी को गंभीरता से लें।    डायरिया की समस्या का निवारण तभी हो सकता है जब हम पहले से उससे लड़ने के लिए तैयार रहें। वैसे तो हर प्रकार की बीमारी हमारे शरीर के लिए खतरनाक होती है परंतु डायरिया जैसी छोटी बीमारियां कभी कभी वो काम कर जाती है जो बड़ी बीमारी नहीं कर पाती। अगर सही समय पर ऐसी समस्याओं का इलाज न किया गया तो ये हमारी जान की दुश्मन बन जाती है। इसलिए आवश्यक है कि समय रहते हैं हम डायरिया यानी कि दस्त की बीमारी के लक्षणों को पहचान कर इससे बचने के उपायों को अपनाना शुरू कर दें।     डायरिया के लक्षण-  दस्त के लक्षणों को कोई भी व्यक्ति काफी आसानी से पहचान सकता है। परंतु कई बार ऐसा होता है कि लोग दस्त के लक्षणों को किसी और बीमारी का लक्षण समझ कर उस बीमारी का इलाज शुरू कर देते हैं जिसकी वजह से नई परेशानी शुरू हो जाती है। ऐसी गलतफहमी से बचने के लिए जरूरी है कि हमारे पास सही जानकारी हो और हम आपको अपने इस लेख के जरिये वही जानकारी देने जा रहे हैं। आइए नजर डालते हैं डायरिया की शुरुआत से पहले शरीर में दिखने वाले लक्षणों पर-    1) मल पतला होना- डायरिया का सबसे बड़ा और मुख्य लक्षण है मल का पतला होना। ऐसा वायरल इंफेक्शन की वजह से होता है। शरीर का सारा तरल पदार्थ मल के जरिये हमारे शरीर से बाहर निकल जाता है और इसी को दस्त कहा जाता है।   2) बुखार- बुखार की वजह से भी कई बार डायरिया की शुरुआत हो जाती है। बुखार के समय शरीर का पाचन तंत्र सही प्रकार से काम नहीं करता जिसकी वजह से मल काफी पतला होने लगता है।     3) भूख की कमी- डायरिया का एक और मुख्य लक्षण भूख की कमी भी होती है। भूख की कमी का मतलब शरीर में आहार की कमी। और ऐसी परिस्थिति में शरीर में मौजूद तरल पदार्थ मल त्याग से समय शरीर से बाहर निकलने लगता है।     4) मतली और उल्टी- दस्त की शुरुआत से पहले मतली और उल्टी होना भी सामान्य है। अगर किसी व्यक्ति को ऐसा होता है तो उसे समझ जाना चाहिए कि उसकी शारीरिक स्थिति ठीक नही है। पाचन तंत्र में खराबी की वजह से खाना ठीक प्रकार पचता नहीं है और ओवरफ्लो की वजह से उल्टी की संभावनाएं बढ़ जाती है।     5) पेट में ऐंठन- पेट में ऐंठन भी डायरिया का एक महत्वपूर्ण लक्षण होता है। ऐसा तब होता है जब शरीर किसी विशेष प्रकार के खाने को पचाने में असमर्थ हो जाता है।     उपयुक्त लक्षणों की पहचान करके इस बात को समझना बहुत आसान है कि व्यक्ति को दस्त की समस्या होने वाली है या नहीं। और यदि आपको डायरिया की समस्या से बचना है तो नीचे दिए गए उपायों को अपनाकर खुद को स्वस्थ रखने की कोशिश करें।     डायरिया से कैसे बचें-     1) पर्याप्त नींद- पर्याप्त नींद न लेने से डायरिया जैसी बहुत सी बीमारी का जन्म हो जाता है। इसलिए आवश्यक है कि हम सभी कम से कम 8 घण्टे की नींद अवश्य लें क्योंकि इससे हमारे स्वास्थ्य पर बहुत ही पॉजिटिव असर होता है।     2) मसालेदार भोजन- मसालेदार भोजन की वजह से डायरिया होना बहुत आम बात है। इसलिए जितना कम से कम हो सके उतना कम मसाले का सेवन करें। सादा भोजन हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा होता है।     3) पोषक तत्वों का सेवन- डायरिया से बचने के लिए पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन बहुत जरूरी है। हरी सब्जियों और फल के सेवन से हमे पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं।    4) समय समय पर हांथ धुलें- महज ठीक तरह से हाथ धोकर भी डायरिया से काफी हद तक बचे रहा जा सकता है। बच्चों के लिए हाथ धोने का तरीका खासतौर से महत्वपूर्ण है। हाथ धोने से शरीर के ऊपर मौजूद हानिकारक वायरस हट जाते हैं जिससे कि डायरिया का इन्फेक्शन होने के चांस बहुत कम हो जाते हैं।     5) तांबे के बर्तन में पानी पिएं- वैज्ञानिक शोधों के अनुसार पीने के पानी को तांबे के बरतन में रखना बेहतर उपाय है। तांबे के बरतन में पानी रखने से 40-45 मिनट के भीतर तमाम तरह के रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।     अगर हम उपयुक्त उपायों को अपने जीवन में अपनाते हैं तो निश्चित ही हम डायरिया जैसी खतरनाक बीमारी से खुद को दूर रख सकेंगे। किसी भी व्यक्ति को दस्त की समस्या को कभी भी साधारण नहीं समझना चाहिए क्योंकि यह समस्या जितनी आम है उतनी ही ज्यादा खतरनाक भी है। इसलिए जितना हो सके खुद को इस समस्या से बचाने के प्रयासों में जुटे रहे।       अगर आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो और आप चाहते हैं कि पूरा भारत आरोग्य बने तो मिशन आरोग्यम से जुड़ें। मिशन आरोग्यम से जुड़ने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल मिशन आरोग्यम को सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को 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मलेरिया क्या है और क्यों होता है?

भारत में जब भी बारिश का मौसम आता है अपने साथ कई तरह की नई बीमारियां भी लेकर आता है और उन्हीं बीमारियों में से एक है मलेरिया। हर साल लगभग 42 करोड़ लोग इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं और यही नहीं साल भर में मलेरिया की वजह से 20 लाख से 30 लाख लोग अपनी जान गवां देते हैं। मलेरिया एक ऐसा रोग है जिसमे रोगी को सर्दी और सिरदर्द के साथ बार-बार बुखार आता है। इसमें बुखार कभी कम हो जाता है तो कभी दुबारा आ जाता है। गंभीर मामलों में रोगी कोमा में चला जाता है या उसकी मृत्यु तक हो जाती है। इसलिए आवश्यक है कि हम मलेरिया की समस्या को नजरअंदाज न करें और इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करें।   मलेरिया क्या है और क्यों होता है?   मलेरिया की समस्या आमतौर पर बारिश का पानी जमने के बाद उसमें पैदा हुए मछरों की वजह से होती है। मलेरिया प्लाज़्मोडियम नामक परजीवी (parasite) के कारण होता है। मलेरिया, मादा एनोफेलीज मच्छर (Anopheles mosquito) के काटने से शुरू होता है जो इस परजीवी को शरीर में छोड़ता है। भारत में इस खतरनाकबीमारी का खतरा पूरे साल बना रहता है। हालांकिबारिश के दौरान और बारिश के बाद यह बीमारी अधिक लोगों को होती है।     वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के मुताबिक दक्षिण पूर्व एशिया में कुल मलेरिया के मामलों में से 77% मामले भारत में हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, गोवा, दक्षिणी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में अत्यधिक पाई जाती है क्योंकि इस छेत्र में नमी काफी होती है।     मलेरिया की बीमारी उन चुनिंदा बीमारियों में शामिल है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत ही आसानी से फैल जाती हैं। इसी कारण से मलेरिया के मरीज ज्यादा देखने को मिलते हैं। आइए हम इस बात को भी समझ लेते हैं कि आखिर किस प्रकार मलेरिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल जाता है।       मेलरिया कैसे फैलता है?   मलेरिया के फैलाव को काफी आसानी के साथ समझा जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति मलेरिया से पीड़ित है तो जब उससे एनोफेलीज मच्छर काटता है तो उस मच्छर में मलेरिया के परजीवी चले जाते हैं। यदि दूसरे शब्दों में समझा जाए तो मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति को काटने के बाद मच्छर के अंदर मलेरिया को उत्पन्न करने वाला परजीवी चला जाता है। और इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अगर वही मच्छर तुरंत किसी और व्यक्ति को काटता है तो फिर उस व्यक्ति के अंदर भी मलेरिया का वायरस चला जाता है यानी कि परजीवी चला जाता है। परजीवी शरीर में जाने के बाद सीधा व्यक्ति के लिवर में चला जाता है और 1 वर्ष तक लीवर में रहता है। जब परजीवी परिपक्व यानी कि मैच्योर होते हैं तो वे लिवर को छोड़ देते हैं और व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करते हैं। यह तब होता है जब आमतौर पर लोगों में मलेरिया के लक्षण विकसित होते हैं।   तो अब आपके समझ में आ ही गया होगा कि मलेरिया कितनी खतरनाक बीमारी है। मलेरिया सीधा आपकी रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करती है। आमतौर पर कम उम्र के बच्चे गर्भवती महिलाएं और बुजुर्गों में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है। इस बीमारी से बचने के उपाय और इसके लक्षणों के बारे में हम अगले लेख में आप से चर्चा करेंगे। लेकिन अभी के लिए आप इस बात को समझ लीजिए और जान लीजिए कि यह बीमारी बहुत ही खतरनाक है इसे आम समझने की भूल ना करें।    मलेरिया से बचाव    बीमारी चाहे कोई भी हो लेकिन शुरू होने से पहले व्यक्ति के शरीर में कोई ना कोई लक्षण अवश्य दिखाती है जिसे पहचान कर अगर हम उससे बचने के उपायों को अपना ले तो अवश्य ही हम खुद को उस बीमारी से और उसके खतरनाक परिणामों से खुद को बचा सकते हैं। मलेरियाभी उन बीमारियों में शामिल है जिसके शुरुआती लक्षणों को अगर पहचान लिया जाए तो उससे बचा जा सकता है।     मलेरिया इतनी खतरनाक बीमारी है कि गंभीर मामलों में मरीज मूर्च्छा में जा सकता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए आवश्यक है कि हम समय रहते इससे बचने के प्रयासों को अपनाएं। यह लेख उन लोगों के लिए है जो मलेरिया के लक्षणों और उससे बचने के उपायों के बारे में जानना चाहते हैं।     मलेरिया के लक्षण-   आमतौर पर मलेरिया की बीमारी शुरू होने और लक्षण के विकसित होने के बीच का समय लगभग 7 से 18 दिन का होता है। हालांकि कुछ मामले ऐसे भी होते हैं जिनमें लक्षण विकसित होने में 1 साल तक का समय लग जाता है लेकिन जो लक्षण विकसित होते हैं वह सब तरह के मामलों में समान होते हैं--    1) बुखार- मलेरिया के शुरू होने का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि शरीर का तापमान बढ़ जाता है यानी कि व्यक्ति को बुखार हो जाता है। यदि बारिश के मौसम के बाद आप को बुखार जैसी कोई समस्या हो रही तो आपको तुरंत चेकअप करवाना चाहिए हो सकता है आपके शरीर में मलेरिया की शुरुआत हो रही हो।    2) ठंड लगना- ठंड लगना भी मलेरिया के लक्षण माना जाता है। मलेरिया की शुरुआत के समय ठंड लगने के साथ-साथ आपके शरीर मे कपकपाहट भी शुरू हो जाती है।     3) उल्टी होना - अगर किसी व्यक्ति को उल्टी होनी शुरू हो गई है तो उस व्यक्ति को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए आवश्यक है कि व्यक्ति तुरंत डॉक्टर के पास जाकर जांच करवाएं कि आखिर किस वजह से उल्टी हो रही है। कई दफा मलेरिया की शुरुआत से पहले भी व्यक्ति को उल्टियां होती हैं।     4) पसीना आना- शरीर से अधिक मात्रा में पसीना निकलना भी मलेरिया का एक महत्वपूर्ण लक्षण होता है। जैसे-जैसे मलेरिया का परजीवीशरीर में फैलता है व्यक्ति के शरीर से पसीना अधिक मात्रा में निष्कासित होने लगता है।   5) मांसपेशियों में दर्द होना,दस्त, आम तौर पर अस्वस्थ महसूस करना भी मलेरिया के कुछ महत्वपूर्ण लक्षण हैं।    किसी भी बीमारी के लक्षणों को पहचानना तो काफी आसान है, लेकिन मुश्किल काम यहहै कि लक्षणों को पहचानने के बाद हम उस बीमारी से बचने के लिए उपायों को अपनापाते हैं या नहीं। मलेरिया से बचने के उपायों को अगर सही समय पर ना अपनाया गया तो यह बीमारी हमारी जान भी ले सकती है।    मलेरिया से कैसे बचें-  1) मलेरिया से बचने का सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण तरीका यही है कि मच्छरों को अपने घर में न पनपने दें। बारिश के पानी को जमने से रोकें जिससे कि मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का जन्म न हो सके। ऐसी जगह पर ना जाएं जहां पर बारिश का पानी जमा हो।    2) शामकोजितना ज्यादा हो सके घर से बाहर ना निकले, घर में रहने का प्रयास करें और रात के समय अत्यधिक ध्यान दें क्योंकि रात के समय मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। मछरदानी का उपयोग करें।     3) अगर किसी कारणवश आपको बाहर जाना पड़ता है तो कोशिश करें कि ऐसे कपड़े पहने जिससे आपका शरीर पूरी तरह ढका रहे।     4) समय समय पर जांच करवाते रहें। अगर आपके शरीर में उपयुक्त दिए गए लक्षण उत्पन्न होते हैं तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं क्योंकि जांच के बाद भी इस बात का पता चल पाएगा कि व्यक्ति को मलेरिया है या फिर कोई और बीमारी है।     5)जब भी आपको लगे कि आपको मलेरिया समस्या हो रही है तो आपको एंटी मलेरिया दवा खानी चाहिए यह दवा मलेरिया को रोकने का प्रयास करती है। आयुर्वेद में मलेरिया का शानदार उपचार मौजूद है इस उपचार के बारे में हम आपको अगले हिस्से में विस्तार से बताएंगे।     मलेरिया इतनी खतरनाक बीमारी है कि इसकी वजह से आपको और भी बहुत सारी जानलेवा बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। एनीमिया, सांस लेने में परेशानी, कुछ महत्वपूर्ण अंगों का काम ना करना मलेरिया के दुष्प्रभाव से उत्पन्न होने वाले कुछ गंभीर समस्याएं हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि एक बार पुरी तरह सही होने के कुछ समय बाद फिर से मलेरिया के लक्षण व्यक्ति में देखने को मिल जाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि इस बीमारी को हम हल्के में बिल्कुल भी ना लें।       अगर आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो और आप चाहते हैं कि पूरा भारत आरोग्य बने तो मिशन आरोग्यम से जुड़ें। मिशन आरोग्यम से जुड़ने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल मिशन आरोग्यम को सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को दबाना न भूलें। { youtube )

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पुनर्नवा के फायदे

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां पिछले कई शताब्दियों से लोगों को अनेक प्रकार की बीमारियों से बचाती रहीं हैं। इसके बावजूद आज आलम यह है कि लोग आयुर्वेद की खासियत को नजरअंदाज कर के एलोपैथी के बिछाए दलदल में फंसते चले जा रहे हैं। लोगों को इस बात का बिल्कुल भी एहसास नहीं है कि अंग्रेजी दवाएं उनके शरीर को अंदर से खोखला कर रहीं हैं। लोगों की इसी गलतफहमी को मिटाने के लिए और आयुर्वेद से उनका नाता फिरसे जोड़ने के लिए हमने मिशन आरोग्यम की शुरुआत की है। इस मिशन के अंतर्गत हम लोगों को आयुर्वेद और आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की विशेषताओं से परिचित करवाते हैं। हमारा आज का जो विषय है वो है एक खास चमत्कारी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी के बारे में। आज हम आपको पुनर्नवा नामक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी के बारे में बताएंगे कि आखिर किस तरह भारत में मिलने वाला यह चमत्कारी पौधा हमें बहुत तरह की बीमारियों से राहत दे सकता है। पुनर्नवा क्या है? पुनर्नवा एक ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका पौधा हर वर्ष नया हो जाता है और इसी कारणवश इसका नाम पुनर्नवा रखा गया है। पुनर्नवा भारत के हर भाग में पाई जाती है। पुनर्नवा का पौधा विशेषकर दो तरह का होता है. सफेद पुनर्नवा. सफेद पुनर्नवा के पत्ते चिकनेए दलदार और रस भरे हुए होते हैं। लाल पुनर्नवा. लाल पुनर्नवा के पत्ते सफेद पुनर्नवा के पत्तों से छोटे और पतले होते हैं। ऐसा बिल्कुल मत सोचिएगा की उपयुक्त में से केवल एक ही पौधा लाभदायक होता है क्योंकि लाल पुनर्नवा और सफेद पुनर्नवा दोनों ही मनुष्य जाति के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। पुनर्नवा एक ऐसी औषधि है जो कई प्रकार के रोगों को शरीर से दूर रखने और उन रोगों के उपचार में भी मदद करती है। पुनर्नवा का सेवन करने वाले लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से भी बचे रहते हैं। आमतौर पर पुनर्नवा जड़ी.बूटी के रूप में पाया जाता है लेकिन इसे टेबलेट और पाउडर के रूप में सबसे ज्यादा लोगों के द्वारा खरीदा जाता है। पुनर्नवा को घर पर कैसे उगाएं. पुनर्नवा को घर पर भी काफी आसानी के साथ उगाया जा सकता है। दुकानों में आजकल पुनर्नवा के बीज उपलब्ध होते हैं तो आप वहां से जाकरए बीच खरीदकर उन्हें घर में लगा दीजिए। कुछ ही दिनों में आपको पुनर्नवा का पौधा बिल्कुल तैयार मिलेगा। पुनर्नवा के पेड़ पर भी बीज उपलब्ध होते हैं अगर आप उन बीजों को लेकर भी अपने घर में लगाएंगे तो भी पौधा तैयार हो जाएगा। अगर आपको ताजा पुनर्नवा का पौधा मिल रहा है तो आप उसको जड़ सहित उखाड़ कर घर में लगा सकते हैं। पुनर्नवा के फायदे. 1) हृदय रोग से बचाता है. पुनर्नवा मनुष्य के हृदय के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है और यह मनुष्य को कई प्रकार के हृदय के रोगों से भी सुरक्षित रखता है। पुनर्नवा में कार्डियोप्रोटेक्टिव गुण पाया जाता है। कार्डियोप्रोटेक्टिव ऐसा गुण होता है जो हृदय से जुड़ी कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाए रखता है और इसे विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाने के लिए भी सुरक्षा कवच का कार्य करता है। 2) यूरिन इन्फेक्शन से राहत. आजकल लोगों को गलत पान खानपान की वजह से कई बीमारियां हो जाती है और यूरिन इन्फेक्शन उनमें से एक है। इस इंफेक्शन से पुरुष और महिलाएं समान रूप से प्रभावित होते हैं। यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से बचे रहने के लिए पुनर्नवा काफी प्रभावशाली औषधि साबित हो सकती है। 3) पुरुषों की यौन शक्ति बढ़ाता है. आजकल कई पुरुष अपनी कमजोर यौन शक्ति के कारण काफी परेशान रहते हैं ऐसे में उनकी मदद पुनर्नवा कर सकता है। पुनर्नवा पाउडर को दूध में मिलाकर पीने से पौरुष शक्ति को मजबूत बनाया जा सकता है क्योंकि इसमें टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को बढ़ाने का गुण पाया जाता है। 4) किडनी के रोग से बचाता है. पुनर्नवा का सबसे खास और महत्वपूर्ण फायदा यह होता है कि यह इंसान को किडनी के हर तरह के रोग से सुरक्षा प्रदान करता है। वैज्ञानिकों ने शोध के बाद यह साबित कर दिया है कि किडनी की समस्याओं से बचने के लिए पुनर्नवा सबसे अच्छी औषधि है। 5) ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है. भारत में लगभग हर व्यक्ति की समस्या बन चुके ब्लड प्रेशर से भी पुनर्नवा आपको राहत दे सकता है। हाई ब्लड प्रेशर और लो ब्लड प्रेशर दोनों तरह के रोगियों को पुनर्नवा का इस्तेमाल करना चाहिए। पुनर्नवा में मौजूद मैग्नीशियम की मात्रा ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में काफी मददगार साबित हो सकती है। उपयुक्त समस्याओं के अलावा भी बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें पुनर्नवा आप के लिए वरदान साबित हो सकता है। जैसे कि चेहरे पर आ रही झुर्रियों से छुटकारा दिलाने मेंए फेफड़ों की सूजनए आंखों का फूलनाए खांसी जुकामए मोतियाबिंदए कब्जए गठिया और स्तन रोग। हमने तो आपको महज कुछ मुख्य समस्याओं के बारे में बताया हैए लेकिन ऐसी मनुष्य के जीवन में बहुत छोटी.छोटी समस्याएं होती है जिसका वह इलाज ढूंढ़ते.ढूंढ़ते परेशान हो जाता है। ऐसे में पुनर्नवा आपके लिए बहुत ही सटीक जड़ी बूटी है। इसका इस्तेमाल करने से आपको जीवन की लगभग सभी छोटी.छोटी बीमारियों से राहत मिलेगी। अगर आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो और आप चाहते हैं कि पूरा भारत आरोग्य बने तो मिशन आरोग्यम से जुड़ें। मिशन आरोग्यम से जुड़ने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल मिशन आरोग्यम को सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को दबाना न भूलें। ( youtube )

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तुलसी के फायदे

  कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो हमें लगभग हर घर में देखने को मिल जातीं हैं। तुलसी का पौधा उन्हीं में से एक है। हिन्दू धर्म में तुलसी को एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। तुलसी में औसधीय गुण तो हैं ही साथ ही साथ लोग इसको पूजनीय भी मानते हैं और इसलिए बहुत से घरों में तुलसी पर रोजाना जल अर्पित करके इसकी पूजा अर्चना भी की जाती हैं।   आयुर्वेद में भी तुलसी को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है। तुलसी को “जड़ी बूटियों की रानी” और “जीवन के लिए अमृत” कहा जाता है। औषधीय, पाक और आध्यात्मिक गुणों के कारण तुलसी को अन्य जड़ी बूटियों से ऊपर रखा जाता है। तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल सिर्फ दवाइयों में ही नहीं बल्कि भोजन में भी किया जाता है।   आज हम आपको तुलसी के आयुर्वेदिक महत्वों से परिचित करवाएंगे। हम आपको बताएंगे कि आखिरकौन-कौन सी खतरनाक, जानलेवा बीमारियों से बचने के लिए हम तुलसी का प्रयोग कर सकते हैं।   तुलसी की विशेषता क्या है? तुलसी वास्तव में एक छोटा पौधा होता है। तुलसी के पौधे का आकार और रंग स्थान की भौगोलिक स्थिति, बारिश और पौधे के प्रकार पर निर्भर करती है। तुलसी की तीन अलग-अलग प्रजातियां होती हैं। हरी पत्तियों वाली रामा तुलसी, बैंगनी पत्तियों वाली कृष्ण(श्यामा) तुलसी और जंगली किस्म की हल्की हरे रंग की पत्तियों वाली वन तुलसी होती है। तीनों ही तुलसी रंग रूप में चाहे अलग अलग हों परंतु तीनों ही मनुष्य के लिए अत्यंत फायदेमंद साबित होती हैं।   तुलसी का स्वाद तीखा होता है। तुलसी में माइक्रोबियल-रोधी, सूजन-रोधी, गठिया-रोधी, लिवर को सुरक्षा देने वाले, डायबिटीज-रोधी, दमा-रोधी गुण पाए जाते हैं। आइए एक नजर डालते हैं कि आखिर किस तरह से हम अपने घर में ही तुलसी का चमत्कारी पौधा उगा सकते हैं।  घर में तुलसी का पौधा कैसे उगाएं? तुलसी का पौधा काफी आसानी के साथ लगाया जा सकता है। गमले में या फिर घर के बाहर क्यारी में तुलसी का पौधरोपण किया जा सकता है। तुलसी का पौधा 30 से 60 सेमी तक ऊँचा होता है और इसके फूल छोटे-छोटे सफेद और बैगनी रंग के होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जुलाई से अक्टूबर तक होता है। अगर आपके आसपास कहीं भी तुलसी का पौधा है तो वहां से आप जड़ सहित एक डाल लें सकते हैं या फिर बाहर किसी दुकान से जड़ सहित पौधा खरीदकर घर में लगा सकते हैं। कुछ ही दिन में आपके घर में तुसली का पौधा जगमगाने लगेगा।   तुलसी के फायदे-  1) दिमाग के लिए फायदेमंद- आयुर्वेद के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को अपने दिमाग यानी की माइंड को और अच्छा करना है तो तुलसी उसके लिए सबसे कारगर सिद्ध हो सकती है। तुलसी के रोजाना सेवन से मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है और याददाश्त तेज होती है। 2) कान में दर्द एवं सूजन से छुटकारा- अगर किसी व्यक्ति के कान में दर्द है तो तुलसी के पत्त्ते का रस निकालकर उसे गर्म करके दो-दो बूंद कान में डालने से कान का दर्द बहुत जल्द गायब हो जाएगा।   3) सूखी खांसी और दमा से राहत- तुलसी की पत्तियां अस्थमा के मरीजों और सूखी खांसी से पीड़ित लोगों के लिए भी बहुत ही ज्यादा लाभकारी हैं। इसके लिए तुलसी की मंजरी, सोंठ, प्याज का रस और शहद को मिला लें और इस मिश्रण को चाटकर खाएं, इसके सेवन से सूखी खांसी और अस्थमा में लाभ होता है।  4) डायरिया से छुटकारा- गलत खान पान का सीधा असर हमारे पेट पर होता है और उसी कारण डायरिया जैसी खतरनाक समस्या उत्पन्न हो जाती है। तुलसी की पत्तियां डायरिया, पेट में मरोड़ आदि समस्याओं से आराम दिलाने में कारगर सिद्ध होती हैं।   5) पीलिया से छुटकारा- आज के समय में पीलिया की समस्या भी काफी आम हो गई है। अगर सही समय पर इस बीमारी का इलाज न किया जाए तो आगेचलकर ये बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। 20-30 तुलसी के पत्तों को पीसकर छाछ के साथ मिलाकर पीने से पीलिया में लाभ होता है। इसके अलावा तुलसी के पत्तियों का काढ़ा बनाकर पीने से भी पीलिया में आराम मिलता है।  6) मलेरिया में फायदेमंद- तुलसी का पौधा मलेरिया प्रतिरोधक होता है। जिस जगह तुलसी का पौधा मौजूद होता है वहां पर मलेरिया वाले मच्छर पनप नहीं पाते हैं। तुलसी की पत्तियों का काढ़ा बनाकर सुबह, दोपहर और शाम को पीने से मलेरिया में लाभ होता है।   टायफाइड, सर दर्द, सर्दी जुकाम, सफेद दाग, त्वचा रोग, नपुंसकता, पथरी, मूत्र में जलन, गले की समस्या, दांत दर्द, रतौंधी, सर में जूं, दाद, सांसों की दुर्गंध, बुखार आदि कुछ ऐसी सामान्य समस्याएं हैं जिससे कि तुलसी हमें बचा सकती है।   अगर आपके घर में अभी तक तुलसी का पौधा नहीं है तो आपके पास मौका है कि आज ही तुलसी का पौधरोपण करके हजारों बीमारियों को अपने घर से दूर कर दीजिए। रोजाना 5-10 तुलसी पत्तों के सेवन से आपके जीवन की बहुत सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी।   अगर आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो और आप चाहते हैं कि पूरा भारत आरोग्य बने तो मिशन आरोग्यम से जुड़ें। मिशन आरोग्यम से जुड़ने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल मिशन आरोग्यम को सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को दबाना न भूलें। ( youtube )

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Manduvadih Lahartara Road, Shivdaspur, near Hori Lal Park/Lawn, Varanasi, Uttar Pradesh 221103

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